अनूपपुर, 06 अप्रैल 2026/ वृद्धावस्था में अपनों के सहारे की आस रखने वाले वरिष्ठजनों के लिए ‘‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम-2007’’ एक मजबूत कानूनी आधार बनकर सामने आया है। यह अधिनियम बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार सुनिश्चित करता है।
अधिनियम के प्रमुख प्रावधान एवं लाभ
23 अगस्त 2008 से लागू इस कानून के अंतर्गत, आय या संपत्ति के अभाव में वरिष्ठ नागरिक अपने वयस्क बच्चों या विधिक उत्तराधिकारियों से भरण-पोषण हेतु मांग कर सकते हैं। भरण-पोषण में वित्तीय सहायता के साथ भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा और मनोरंजन जैसी आवश्यकताएँ शामिल हैं।
वित्तीय सीमा-ट्रिब्यूनल अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह भरण-पोषण दिला सकता है।
कठोर दंडात्मक कार्यवाही- वरिष्ठजनों की उपेक्षा या परित्याग एक संज्ञेय अपराध है। दोषी को 5,000 रुपये जुर्माना, 3 माह कारावास, या दोनों दंड मिल सकते हैं।
सहायता कैसे प्राप्त करें
वरिष्ठ नागरिक अपने क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम के समक्ष आवेदन कर सकते हैं। प्रशासन द्वारा त्वरित निपटान सुनिश्चित किया जाएगा।
यह अधिनियम समाज के बुजुर्गों के प्रति हमारी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वरिष्ठ नागरिक वृद्धावस्था में असहाय महसूस न करे।





























































