राजनगर के जंगलों से खुलेआम हो रहा है रेत का अवैध उत्खनन
वन विभाग के कर्मचारी के कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवाल
राजनगर

जिले के अंतिम छोर पर बसे राजनगर कोयलांचल क्षेत्र एवं आसपास के जंगलों से जिस प्रकार से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है उससे वन विभाग के कर्मचारियों के कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है जिसे लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है
जिस संबंध में स्थानीय निवासियों का कहना है कि राजनगर कोयलांचल की तीन नगर परिषद राजनगर ,डोला ,डूमर कछार कॉलरी प्रभावित क्षेत्र है जहां पर निकाय द्वारा जब भी कोई विकास कार्य कराया जाता है तो स्थानी बनकर्मियों द्वारा आकर यह कहकर रोक लगा दी जाती है कि यह वन विभाग कि ली हुई लीज है इस पर निर्माण कार्य नहीं हो सकते
वहीं वर्तमान समय में तीनों परिषदों के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्र, भलमुडी, कुलड़िया नाला, केरहा इंदिरा नगर के जंगल, पैराधार वार्ड नंबर 2 के पास के जंगल, झीमर नाला मलगा नाला राजनगर मैगजीन सहित सेमरा एवं झिरिया टोला के जंगलों से खुलेआम तकरीबन 8 से 10 ट्रैक्टर वाहनों से रेत का खुलेआम अवैध खनन चिन्हित स्थानों से किया जाता है फिर भी स्थानीय बन कर्मियों की नजर इस अवैध रेत उत्खनन पर क्यों नहीं पड़ती जो वन कर्मियों के कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है तो ऊपर बैठे अधिकारियों के लिए भी एक प्रश्न है कि आखिर में यह वन कर्मी करते क्या है। जो खुलेआम हो रहे हैं अवैध रेत उत्खनन पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं
इस संबंध में जब जिला वन मंडला अधिकारी डेविड व्यंकट राव चनाप से बात किया गया तो उनके द्वारा मीटिंग में होना कहकर फोन काट दिया गया जिससे उनसे बात नहीं हो पाई



























































