अनूपपुर 3 नवंबर 2026/ फसल अवशेष (पराली) किसानों के लिए बहुमूल्य संसाधन हैं, जिनका उचित प्रबंधन कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और कृषि उत्पादन में सुधार किया जा सकता है। किसान भाई पराली को जलाने के बजाय खेत में मिलाकर उसका उपयोग जैविक खाद के रूप में करें। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के मित्र कीट नष्ट होते हैं तथा भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है।
कृषि विभाग के अनुसार, पराली को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर अथवा वेस्ट डी-कम्पोजर की सहायता से खेत में मिलाकर कम्पोस्ट खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, अगली फसल की उपज में वृद्धि होती है तथा खाद पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। फसल अवशेष पशुओं के लिए चारे का महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं।
पराली प्रबंधन को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग द्वारा रीपर, रीपर कम्बाइनर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रा रीपर एवं रोटावेटर जैसे कृषि यंत्रों पर अनुदान प्रदान किया जा रहा है। किसान भाई पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा स्वयं एवं समाज के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए पराली प्रबंधन अपनाएं और पराली जलाने से बचें।







































































