महर्षि महेश योगी संस्थान की जमीन घोटाले का मास्टरमाइंड ईडी के शिकंजे में
एमपी-छत्तीसगढ़ में करोड़ों की जमीन फर्जी तरीके से बेचने का आरोप, दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार
कोयलांचल समाचार के लिए ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी, धार

महर्षि महेश योगी संस्थान से जुड़ी सैकड़ों करोड़ रुपए मूल्य की जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेचने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ईडी ने जी. रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय को हिरासत में लेकर पटियाला हाउस कोर्ट नई दिल्ली में पेश किया।
जांच एजेंसी के अनुसार यह कार्रवाई मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में दर्ज कई एफआईआर और विस्तृत जांच के बाद की गई। आरोप है कि आरोपियों ने नकली पावर ऑफ अटॉर्नी, फर्जी बोर्ड प्रस्ताव और जाली अनुमति पत्र तैयार कर “द स्पिरिचुअल रीजेनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया” (एसआरएमएफ) की करोड़ों की जमीनों को अवैध रूप से बेच दिया।
ईडी के मुताबिक जी. रामचंद्र मोहन इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है। उसने खुद को एसआरएमएफ का कोषाध्यक्ष बताते हुए समान नाम से फर्जी संस्था बनाई, नकली पैन कार्ड हासिल किया और अवैध बैंक खातों के जरिए रकम का लेनदेन किया। वहीं आकाश मालवीय ने खुद को ट्रस्ट का कार्यकारी सदस्य बताकर फर्जी बिक्री दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
जांच में सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और उसके निदेशकों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। ईडी ने कंपनी और संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों व चल संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश के धार, शाजापुर, देवास सहित कई जिलों में संस्थान की जमीनें औने-पौने दामों पर बेची गईं। ईडी अब पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।



































