जनपद कार्यालय से चंद कदम दूर विकास कार्यों पर उठे सवाल!
पंचायत से महज 10 मीटर की दूरी पर पेयजल पाइपलाइन कार्य को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
सरपंच-सचिव पर मनमानी का आरोप, बोले ग्रामीण— “जनता की आवाज दबाकर नहीं हो सकता विकास

अनूपपुर/ जनपद पंचायत बदरा अंतर्गत ग्राम पंचायत बदरा में पेयजल पाइपलाइन विस्तार कार्य को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन और जनपद पंचायत कार्यालय से महज 10 मीटर की दूरी पर ही निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि जिस मार्ग से प्रतिदिन अधिकारी और कर्मचारी गुजरते हैं, वहीं कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों के अनुसार बस्ती तक पेयजल पाइपलाइन पहुंचाने के लिए नियमानुसार खुदाई कर पाइप बिछाया जाना था, लेकिन ऐसा न करते हुए पाइप को नाली के भीतर डाल दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे भविष्य में दूषित पानी की आशंका, पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने का खतरा और लाखों रुपये की सरकारी योजना की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने इस कार्य का विरोध कर नियमानुसार निर्माण की मांग की, तो उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने वालों पर प्रभाव और पहुंच का हवाला देकर दबाव बनाया गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि जनपद कार्यालय के सामने ही कथित रूप से नियमों की अनदेखी हो सकती है, तो दूरस्थ पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों की निगरानी किस प्रकार हो रही होगी। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह केवल एक निर्माण कार्य का मामला नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत बदरा में विकास कार्यों में सरपंच व सचिव कि लगातार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन प्रभावी जांच और कार्रवाई के अभाव में जिम्मेदारों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो सरकारी योजनाओं पर जनता का विश्वास कमजोर होगा।
ग्रामीणों ने कलेक्टर अनूपपुर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, एसडीएम तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने तथा यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

















