कोयला धूल, मानकों के पालन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बढ़ा असंतोष; रहवासियों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की

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अमलाई कोल साइडिंग पर प्रदूषण के आरोप: इंदिरा नगर के लोगों ने उठाए स्वास्थ्य और निगरानी व्यवस्था पर सवाल
कोयला धूल, मानकों के पालन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बढ़ा असंतोष; रहवासियों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की

अनूपपुर/शहडोल। अनूपपुर और शहडोल जिले की सीमा से लगे अमलाई क्षेत्र में संचालित कोल साइडिंग को लेकर स्थानीय लोगों का असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। वार्ड क्रमांक 15 इंदिरा नगर, नगर परिषद बकहो के रहवासियों ने आरोप लगाया है कि साइडिंग संचालन के दौरान उड़ने वाली कोयले की धूल और कथित रूप से प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन में कमी के कारण क्षेत्र का वातावरण प्रभावित हो रहा है तथा लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मूल रूप से माल ढुलाई के लिए विकसित इस साइडिंग क्षेत्र में कोयले की गतिविधियां बढ़ने के बाद से आसपास के इलाकों में धूल और प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। रहवासियों के अनुसार कई वर्षों से इस मुद्दे को लेकर शिकायतें, धरना-प्रदर्शन और प्रशासनिक स्तर पर मांगें उठाई जाती रही हैं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।

न्यायालयीय निर्देशों और पालन पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार मामले को लेकर पूर्व में न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया गया था। नागरिकों का दावा है कि संचालन के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने, पानी के नियमित छिड़काव, स्प्रिंकलर सिस्टम और धूल नियंत्रण जैसे उपायों पर जोर दिया गया था। हालांकि नागरिकों का आरोप है कि इन व्यवस्थाओं का क्रियान्वयन प्रभावी रूप से नहीं हो रहा।

रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र में लगाए गए स्प्रिंकलर सिस्टम और अन्य व्यवस्थाएं कई बार निष्क्रिय दिखाई देती हैं, जिससे कोयला लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान धूल का असर आसपास के इलाकों तक पहुंचता है। हालांकि संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

“घर, पानी और हवा तक प्रभावित होने का दावा”

इंदिरा नगर क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि सुबह से शाम तक क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही और गतिविधियों के कारण वातावरण प्रभावित होता है। कुछ नागरिकों ने दावा किया कि घरों की छत, पानी की टंकियां और खुले स्थानों पर काली धूल जमा हो जाती है।

स्थानीय लोगों ने यह भी चिंता जताई कि बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी समस्याओं, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। हालांकि इन स्वास्थ्य संबंधी दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक चिकित्सकीय रिपोर्ट से नहीं हुई है।

प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर उठ रहे प्रश्न

पूरे मामले में स्थानीय लोग प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि संचालन सभी मानकों के अनुरूप हो रहा है तो उसकी नियमित सार्वजनिक समीक्षा और रिपोर्ट भी सामने आनी चाहिए।

नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती, जबकि दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर समय-समय पर निरीक्षण और व्यवस्थाओं के दावे किए जाते रहे हैं।

रेलवे और संचालन व्यवस्था पर स्थानीय चर्चा

क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि समय-समय पर धूल नियंत्रण के लिए कुछ संरचनात्मक व्यवस्थाएं विकसित की गईं, लेकिन स्थानीय लोग दावा करते हैं कि उनका नियमित उपयोग सुनिश्चित नहीं हो पा रहा। इस कारण लोगों में असंतोष बना हुआ है।

रहवासियों की प्रमुख मांगें

  • प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए
  • नियमित पानी का छिड़काव और स्प्रिंकलर संचालन कराया जाए
  • स्वतंत्र जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
  • प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए जाएं
  • नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाए

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मुद्दा केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस विषय पर क्या कदम उठाते हैं।

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