खतरनाक दंतैल हाथी के रेस्क्यू की तैयारी तेज
चार हाथियों का दल पहुंचा छत्तीसगढ़, रामपुर के जंगल में पांचवें दिन डटा अकेला हाथी
कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल

अनूपपुर, 18 मई। अनूपपुर एवं शहडोल जिले में पिछले डेढ़ माह से दहशत का पर्याय बना खतरनाक दंतैल हाथी सोमवार को भी शहडोल जिले के केसवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत रामपुर बीट के जंगल में पांचवें दिन डटा रहा। वहीं चार हाथियों का समूह सोमवार सुबह जैतहरी क्षेत्र से गुजर नाला पार कर छत्तीसगढ़ के मरवाही वन मंडल अंतर्गत दैंगांव गांव के समीप जंगल में पहुंचकर विश्राम करता रहा। लगातार बढ़ती घटनाओं, ग्रामीणों के आक्रोश और जनप्रतिनिधियों के दबाव के बाद अब वन विभाग द्वारा इस खतरनाक हाथी के रेस्क्यू की तैयारी तेज कर दी गई है। सोमवार को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की विशेष रेस्क्यू टीम हाथी के स्वभाव, विचरण क्षेत्र और गतिविधियों का परीक्षण करेगी, जिसके बाद रेस्क्यू को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार पांच हाथियों के समूह में शामिल चार हाथी पिछले लगभग 150 दिनों से अनूपपुर, शहडोल और डिंडोरी जिलों के जंगलों में विचरण कर रहे हैं। यह दल दिन में जंगलों में विश्राम करता है और रात होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ ग्रामीणों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ करता है। रविवार रात यह समूह चोई, कनईटोला, दर्रीटोला, जरियारी, बीड़, चोलना और उमरिया क्षेत्रों से गुजरते हुए सोमवार सुबह करीब 4:30 बजे गुजर नाला पार कर छत्तीसगढ़ राज्य के मरवाही वन क्षेत्र के दैंगांव गांव पहुंच गया।
दूसरी ओर अकेला दंतैल हाथी लगातार अधिक आक्रामक बना हुआ है। बताया गया कि यह हाथी 2 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के कटघोड़ा वन मंडल क्षेत्र से मरवाही होते हुए मध्यप्रदेश में प्रवेश किया था। तब से अब तक यह हाथी अनूपपुर, मरवाही और शहडोल क्षेत्र में भारी तबाही मचा चुका है। इस दौरान हाथी चार लोगों की जान ले चुका है, जबकि दो बच्चों और एक पुरुष को गंभीर रूप से घायल कर चुका है। इसके अलावा आठ पालतू मवेशियों को भी मार डाला गया है।
26 अप्रैल को भोलगढ़ क्षेत्र में एक महिला को पटक-पटक कर मारने के बाद उसके पति और बच्चे को घायल कर दिया था। 29 अप्रैल को सेंदुरी गांव में एक बालक पर हमला किया गया। 30 अप्रैल को जिला मुख्यालय से लगे कुसुमहाई गांव में 23 वर्षीय युवती की क्रूरता पूर्वक हत्या कर दी गई। इसके बाद 7 और 8 मई की रात सेंदुरी गांव में चार मवेशियों को मार डाला गया, जबकि 10 मई को सोनमौहरी क्षेत्र में दो भैंसों को मौत के घाट उतार दिया गया। 13 मई की रात रामपुर क्षेत्र में 55 वर्षीय छोटेलाल सिंह पर हमला कर उसकी जान ले ली गई और घर में तोड़फोड़ कर अनाज खाया गया।
रविवार रात भी हाथी रामपुर के बैरिहा गांव पहुंच गया, जहां राजू यादव के घर में घुसकर तोड़फोड़ की तथा घर में रखा अनाज खाया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर वह जंगल की ओर भाग गया, लेकिन कुछ देर बाद फिर गांव में लौट आया और पप्पू बरगाही के खेत में लगे कटहल के पेड़ को नुकसान पहुंचाते हुए फसल खाई। सोमवार सुबह हाथी पुनः रामपुर जंगल के कक्ष क्रमांक पीएफ-1055 में जाकर ठहर गया।
वन विभाग द्वारा हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। कैमरों और टीमों के माध्यम से निगरानी की जा रही है, लेकिन हाथी की लगातार आक्रामक गतिविधियों के कारण ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है। कई गांवों के लोग आंदोलन की तैयारी में हैं और हाथी को तत्काल क्षेत्र से हटाने की मांग कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के प्रदेशाध्यक्ष ने बताया कि प्रशासन एवं वन विभाग से लगातार चर्चा कर इस खतरनाक हाथी के रेस्क्यू की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जल्द ही क्षेत्रवासियों को इस दहशत से राहत मिलने की उम्मीद है।



































