खतरे में 1300 जिंदगियां: SECL की बंद खदानों में अवैध उत्खनन से अमलाई बस्ती की जमीन फटी, मुख्य सड़क धंसी

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शहडोल

 

खतरे में 1300 जिंदगियां: SECL की बंद खदानों में अवैध उत्खनन से अमलाई बस्ती की जमीन फटी, मुख्य सड़क धंसी

अमलाई (शहडोल)। जिले के अमलाई थाना क्षेत्र से एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है। यहाँ SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) की बंद हो चुकी शारदा अंडरग्राउंड माइन्स के ऊपर बनी मुख्य सड़क ताश के पत्तों की तरह ढह गई है। कोयला माफियाओं द्वारा जमीन के सीने को छलनी कर किए जा रहे अवैध उत्खनन ने पूरी बस्ती के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर दिया है।

खोखली हो चुकी है अमलाई बस्ती की जमीन

जानकारी के अनुसार, शारदा माइन्स के बंद होने के बाद नियमों के तहत भूमिगत खाली जगहों (वॉयड) को सुरक्षित रूप से भरा जाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। माफियाओं ने पुरानी सुरंगों के जरिए अवैध रास्ते बनाकर कोयला निकालना जारी रखा, जिससे जमीन के अंदर का ‘बेसमेंट’ पूरी तरह खोखला हो चुका है। परिणाम स्वरूप, अमलाई बस्ती रोड पर लंबी और गहरी दरारें आ गई हैं और सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया है।

प्रशासन और SECL की चुप्पी पर सवाल

करीब 1300 की आबादी वाली यह बस्ती अब मौत के मुहाने पर है। स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का सीधा आरोप है कि:

अवैध कारोबार: जब माइन्स बंद है, तो बड़े पैमाने पर अवैध कोयला उत्खनन किसकी शह पर हो रहा है?

सुरक्षा में चूक: SECL ने बंद खदानों के मुहानों को पुख्ता तरीके से सील क्यों नहीं किया?

बड़ी अनहोनी की आशंका: यदि कोई मकान गिरता है या जान-माल की हानि होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा—प्रशासन, पुलिस या SECL प्रबंधन?

ग्राउंड रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

प्रभावित क्षेत्र: अमलाई बस्ती मुख्य मार्ग और आसपास के रहवासी इलाके।

संकट: जमीन धंसने से कभी भी ढह सकते हैं लोगों के मकान।

माफिया राज: बेखौफ संचालित हो रही हैं अवैध खदानें, प्रशासन बेखबर।

मांग: तत्काल अवैध उत्खनन पर रोक लगे और धंसी हुई जमीन का तकनीकी सर्वे कर सुरक्षा प्रदान की जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है: “हम हर रात डर के साये में जीते हैं। सड़क धंस चुकी है, अब डर है कि हमारे घर न जमींदोज हो जाएं। प्रशासन को कई बार बताया गया, लेकिन कोयला माफियाओं के रसूख के आगे सबकी बोलती बंद है।”

 

यह केवल एक सड़क का धंसना नहीं है, बल्कि एक बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीवंत प्रमाण है। 1300 लोगों की जान की कीमत कोयले के चंद टुकड़ों से कम नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर को इस पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

बाइट – घनश्याम शर्मा, स्थानीय नागरिक

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