खेल चयन विवाद पर बोले क्रीड़ा प्रभारी कुरैशी

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खेल चयन विवाद पर बोले क्रीड़ा प्रभारी कुरैशी

तथ्यों से ज्यादा भावनात्मक माहौल बनाया गया, चयन प्रक्रिया सामूहिक व्यवस्था का हिस्सा

अनूपपुर। जिले की खेल चयन प्रक्रिया को लेकर हाल ही में उठे विवाद ने अब प्रशासनिक पारदर्शिता, मीडिया की भूमिका और खेल व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खेल प्रतिभाओं की उपेक्षा एवं चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रकाशित समाचारों के बाद क्रीड़ा प्रभारी कुरैशी ने अपना पक्ष सार्वजनिक करते हुए कहा है कि पूरे मामले में तथ्यों से अधिक भावनात्मक और व्यक्तिगत आरोपों को प्रमुखता दी गई है।

कुरैशी ने लिखित स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि खेल चयन प्रक्रिया किसी एक व्यक्ति के निर्णय पर आधारित नहीं होती, बल्कि यह कोच, तकनीकी विशेषज्ञों, खेल संघों और विभागीय अधिकारियों की सामूहिक प्रशासनिक प्रक्रिया का परिणाम होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन निर्धारित मापदंडों, दस्तावेज परीक्षण, आयु सत्यापन और पंजीयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है। ऐसे में किसी एक अधिकारी को पूरी प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार ठहराना वस्तुस्थिति का सरलीकरण है।

उन्होंने कहा कि कई बार ऑनलाइन पंजीयन, जन्मतिथि अथवा दस्तावेज संबंधी तकनीकी त्रुटियां सामने आती हैं, जिन्हें नियमानुसार सुधार प्रक्रिया के माध्यम से ठीक किया जाता है। यदि कहीं कोई विसंगति पाई जाती है तो उसकी जांच और समाधान के लिए विभागीय व्यवस्था मौजूद रहती है। कुरैशी ने यह भी कहा कि यदि किसी खिलाड़ी या अभिभावक को वास्तविक शिकायत थी तो उसके लिए विभागीय शिकायत मंच और जांच प्रक्रिया उपलब्ध थी, लेकिन सीधे सार्वजनिक आरोप लगाना और एकतरफा प्रस्तुति देना निष्पक्षता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।

अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर कुरैशी ने कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उनकी व्यक्तिगत छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ लोग खेल व्यवस्था में सुधार की बजाय व्यक्तिगत आरोपों के माध्यम से माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन जांच तथ्यों, दस्तावेजों और प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए।

कुरैशी ने अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि सीमित संसाधनों के बावजूद कई ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के खिलाड़ियों को जिला, संभाग और राज्य स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। खेल विभाग से जुड़े कुछ लोगों का भी मानना है कि संसाधन सीमित होने के बावजूद जिले में खेल गतिविधियों को सक्रिय बनाए रखना आसान कार्य नहीं है।

इस पूरे मामले में अब मीडिया की भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का मानना है कि विवादित मामलों में दोनों पक्षों को समान अवसर देना पत्रकारिता की मूल जिम्मेदारी है। कुरैशी ने कहा कि समाचार प्रकाशित होने से पहले उनका विस्तृत पक्ष नहीं लिया गया, जबकि उनके पास चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध थी। उन्होंने संतुलित और तथ्य आधारित रिपोर्टिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के विवादों का सीधा असर खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ता है। सार्वजनिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप से युवा खिलाड़ियों में असुरक्षा और अविश्वास की भावना पैदा होती है। कुरैशी ने भी अपील की कि खिलाड़ियों को विवादों से दूर रखा जाए और खेल गतिविधियों को राजनीति अथवा व्यक्तिगत संघर्ष का माध्यम न बनाया जाए।

फिलहाल, खेल चयन प्रक्रिया को लेकर उठा यह विवाद जिले में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शिकायतों और आरोपों की जांच किस प्रकार की जाती है और प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है।

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