48 माह का एरियर्स और नियमित सरकारी नौकरी की मांग को लेकर आंगनबाड़ी यूनियन का सरकार पर दबाव

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48 माह का एरियर्स और नियमित सरकारी नौकरी की मांग को लेकर आंगनबाड़ी यूनियन का सरकार पर दबाव

हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल भुगतान की मांग, कार्यकर्ताओं को बेहतर मोबाइल और स्थायी नियुक्ति देने की उठी आवाज

द्वारा शुक्रवार को भोपाल स्थित शाकिर सदन में आयोजित पत्रकार वार्ता में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के लंबित 48 माह के एरियर्स का तत्काल भुगतान किए जाने तथा नियमित सरकारी कर्मचारी के रूप में स्थायी नियुक्ति देने की मांग जोरदार तरीके से उठाई गई। यूनियन ने कहा कि जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक संबंधित कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान नहीं मिल सका है, जिससे प्रदेशभर की हजारों कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रही हैं

यूनियन की प्रांतीय महासचिव ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि यूनियन द्वारा दायर याचिका पर ने प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को 48 माह का लंबित एरियर्स प्रदान करने का आदेश दिया है। आदेश के अनुसार प्रत्येक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को लगभग 1 लाख 25 हजार रुपए तथा प्रत्येक सहायिका को लगभग 63 हजार रुपए का भुगतान किया जाना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए तत्काल प्रभाव से भुगतान प्रक्रिया प्रारंभ करनी चाहिए।

विभा पांडे ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं वर्षों से महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाने का कार्य कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया। उन्होंने मांग की कि सभी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को स्थायी सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए तथा उन्हें ग्रेच्युटी कानून के तहत लाभ प्रदान किए जाएं।

यूनियन ने मांग रखी कि जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को न्यूनतम 26 हजार रुपए तथा सहायिकाओं को 20 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाए। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा उन्हें अन्य विभागीय कार्यों में न लगाया जाए, क्योंकि इससे आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित संचालन प्रभावित होता है और बच्चों व महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर असर पड़ता है।

पत्रकार वार्ता में यह भी मांग उठाई गई कि प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को शासन द्वारा बेहतर गुणवत्ता के मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पोषण ट्रैकर सहित अन्य ऑनलाइन कार्यों को सुचारु रूप से संचालित किया जा सके। यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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