कदमतोला में एक ही मार्ग पर दो योजनाओं से निर्माण, सरकारी धन के दुरुपयोग पर उठे बड़े सवाल
जमुना कोतमा
ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ग्राम पंचायत कदमतोला से सामने आया मामला सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रहा है। यहाँ एक ऐसी स्थिति निर्मित हो गई है जहाँ हाल ही में लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई पीसीसी सड़क के ऊपर अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 1 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से नई सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस दोहरे निर्माण को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और लोग इसे सरकारी धन की खुली बर्बादी बता रहे हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कदमतोला अंतर्गत “एनएच-43 से पाठ टोला” मार्ग पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में पंचायत मद से लगभग 14 लाख 95 हजार रुपये की लागत से 500 मीटर लंबी पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया था। यह सड़क “देवनाथ बैगा के घर से पाठ बाबा” की ओर जाने वाले मार्ग पर बनाई गई थी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी इसी रास्ते पर करीब दो लाख रुपये की लागत से सड़क निर्माण कार्य किया गया था। यानी बीते एक-दो वर्षों में इस मार्ग पर कई लाख रुपये खर्च कर सड़क को पूरी तरह पक्का और सुगम बनाया जा चुका था।
ग्रामीणों के अनुसार उक्त सड़क वर्तमान में भी अच्छी स्थिति में है और कहीं से भी क्षतिग्रस्त नहीं है। इसके बावजूद अब इसी मार्ग पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 1.76 किलोमीटर लंबी नई सड़क का निर्माण शुरू कर दिया गया है, जिसकी स्वीकृत लागत करीब 122 लाख रुपये बताई जा रही है। एक ही रास्ते पर दो अलग-अलग योजनाओं से निर्माण कार्य होने के कारण ग्रामीणों ने विभागीय सर्वे, डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया तथा अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पीएमजीएसवाई विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए भौतिक सत्यापन किया गया होगा, तब क्या अधिकारियों को हाल ही में बनी पीसीसी सड़क दिखाई नहीं दी? यदि सड़क पहले से ही पूरी तरह पक्की और उपयोग योग्य थी तो उसी मार्ग पर करोड़ों रुपये का नया निर्माण स्वीकृत करने का औचित्य क्या है? ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय समन्वय के अभाव और लापरवाही के कारण सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
मामले को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार की नीति यही है कि एक-दो साल पुरानी और अच्छी हालत वाली सड़क को दोबारा करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया जाए, तो फिर पूरे प्रदेश में ऐसी सड़कों को दोबारा बनवा देना चाहिए। उनका कहना है कि जिन गांवों में आज भी लोग कच्ची सड़कों और बदहाल रास्तों से परेशान हैं, वहाँ विकास कार्यों की जरूरत है, न कि पहले से बनी सड़कों पर दोबारा पैसा बहाने की।
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं कलेक्टर से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौके का निरीक्षण कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर एक ही मार्ग पर दो योजनाओं से निर्माण की अनुमति कैसे दी गई। साथ ही उन अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी लापरवाही या मिलीभगत से सरकारी खजाने को नुकसान पहुँच रहा है।
यह मामला अब केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता, विभागीय जवाबदेही और सरकारी धन के उपयोग पर बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है।



































