विकलांग की फरियाद पर भी नहीं पिघला सिस्टम! आगजनी के आरोपियों के नाम रिपोर्ट से गायब, एसपी के बाद अब आईजी शहडोल से लगाई न्याय की गुहार
अनूपपुर। जिले के भालूमाड़ा थाना अंतर्गत फुनगा पुलिस चौकी क्षेत्र के ग्राम प्यारी नंबर-01 निवासी 65 वर्षीय दिव्यांग (विकलांग) ललुआ चौधरी ने न्याय की आस में अब पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) शहडोल कार्यालय का दरवाजा खटखटाया है। पीड़ित का आरोप है कि उसके घर में आग लगाने वाले नामजद आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शी गवाह और वीडियो उपलब्ध कराने के बावजूद आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। मामले में आईजी शहडोल ने पीड़ित की शिकायत सुनकर उसे शीघ्र न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।
पीड़ित द्वारा आईजी को दिए गए आवेदन के अनुसार 21 जून 2026 की रात लगभग 9:45 बजे ग्राम प्यारी नंबर-01 स्थित उसके घर पर सुरेश केवट, गोविंद केवट, सारथ केवट, जगदीश केवट, गोपाल केवट सहित अन्य लोगों ने कथित रूप से लकड़ियों में कपड़ा बांधकर आग लगा दी। घटना में घर के भीतर रखा पंखा, गद्दा, तकिया, कुर्सी, कपड़े सहित अन्य घरेलू सामान जलकर राख हो गया, जिससे लाखों रुपये का नुकसान होने का दावा किया गया है।
आवेदन में यह भी उल्लेख है कि घटना के समय पीड़ित की पत्नी की आवाज सुनकर परिवार जागा और हल्ला मचाने पर आरोपी वहां से भाग गए। जाते-जाते आरोपियों द्वारा जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। पीड़ित का कहना है कि उसके पुत्र सहित आसपास के लोगों ने पूरी घटना देखी है तथा उसके पास घटना के वीडियो और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं।
ललुआ चौधरी का सबसे गंभीर आरोप फुनगा पुलिस चौकी की कार्यप्रणाली पर है। उनका कहना है कि घटना के तुरंत बाद जब वह रिपोर्ट दर्ज कराने चौकी पहुंचे तो उन्होंने आरोपियों के नाम स्पष्ट रूप से बताए, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट में उनके नाम दर्ज नहीं किए। अगले दिन जब उन्होंने इस संबंध में आपत्ति जताई तो पुलिस ने उल्टा यह कह दिया कि रिपोर्ट में किसी आरोपी का नाम नहीं लिखा गया है। पीड़ित का आरोप है कि उसकी पत्नी से बिना पढ़ाए हस्ताक्षर भी करा लिए गए और वास्तविक तथ्यों के विपरीत रिपोर्ट तैयार कर दी गई।
न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित ने अनूपपुर पुलिस अधीक्षक विक्रांत उरांव से शिकायत की। एसपी द्वारा मामले की जांच के आदेश दिए गए, लेकिन पीड़ित का कहना है कि कई दिन बीत जाने के बाद भी मामला केवल जांच तक सीमित है और किसी आरोपी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
लगातार न्याय के लिए भटक रहे दिव्यांग ललुआ चौधरी अंततः आईजी शहडोल के समक्ष पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए निष्पक्ष जांच एवं आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग की। आईजी ने उन्हें पूरे मामले में न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।
अब क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद भी कार्रवाई कब तक होगी। फिलहाल पीड़ित परिवार को आईजी स्तर से निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय मिलने की उम्मीद है।




































