छत्तीसगढ़ जैसी राशि MP में लागू करने और मैपिया भुगतान की उठी आवाज
अनूपपुर / जैतहरी
जिला अनूपपुर की जनपद पंचायत जैतहरी के दर्जनों ग्राम पिछले कई वर्षों से हाथियों के आतंक से जूझ रहे हैं। फसल नुकसान, घरों की क्षति और जान-माल का खतरा रोज की बात हो गई है। इसी को लेकर युवा नेता *सत्यनारायण राठौर* ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वन्यप्राणियों से मकान क्षति पर निर्धारित मुआवजा राशि को मध्य प्रदेश में भी तत्काल लागू किया जाए और वन विभाग से प्रभावित परिवारों को मैपिया राशि का भुगतान किया जाए।
छत्तीसगढ़ में क्या है प्रावधान
छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग के 18/11/2024 के आदेश के अनुसार हिंसक वन्यप्राणियों द्वारा मकान क्षति पर आर्थिक सहायता राशि बढ़ाई गई है।
– *सामान्य क्षेत्रों में*: पक्का/कच्चा मकान क्षतिग्रस्त होने पर अधिकतम 1,20,000 रुपये तक मुआवजा
25% क्षति – 30,000 रुपये
50% क्षति – 60,000 रुपये
75% क्षति – 90,000 रुपये
100% क्षति – 1,20,000 रुपये
– *पहाड़ी क्षेत्रों में*: पूर्ण क्षति पर अधिकतम 1,30,000 रुपये तक का प्रावधान है।
जैतहरी के गांव परेशान
जैतहरी क्षेत्र के चोलना चोई पड़रिया लहरपुर बेलिया, बरबसपुर, खैरहा, डोला सहित कई गांव हाथी कॉरिडोर पर स्थित हैं। हर साल फसल के साथ-साथ कच्चे मकान भी हाथियों द्वारा तोड़े जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि MP में मुआवजा राशि बहुत कम है और प्रक्रिया भी लंबी खिंचती है, जिससे पीड़ित परिवारों को समय पर मदद नहीं मिल पाती।
सत्यनारायण राठौर ने क्या कहा
युवा नेता सत्यनारायण राठौर ने कहा,
“सीमा से लगे हमारे गांवों की स्थिति छत्तीसगढ़ से अलग नहीं है। जब वहां 1.20 लाख से 1.30 लाख तक मुआवजा दिया जा सकता है तो MP में क्यों नहीं? वन विभाग से मैपिया के नाम पर मिलने वाली राशि भी यहां के किसानों को समय पर नहीं मिल रही। शासन को चाहिए कि वह छत्तीसगढ़ के आदेश को आधार बनाकर MP में भी समान मुआवजा नीति लागू करे।”
उन्होंने मांग की है कि कलेक्टर अनूपपुर और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मुद्दे पर तत्काल बैठक कर प्रभावित परिवारों को राहत दें।
ग्रामीणों की परेशानी
गांव के लोगों का कहना है कि हाथियों के डर से रात भर रखवाली करनी पड़ती है। फसल बचती नहीं और मुआवजे के नाम पर खानापूर्ति होती है। अगर छत्तीसगढ़ जैसी राशि लागू हो जाए तो कम से कम मकान दोबारा बनाने में मदद मिलेगी।
*मांग*
1. छत्तीसगढ़ के समान MP में वन्यप्राणी द्वारा मकान क्षति पर 1.20 लाख से 1.30 लाख तक मुआवजा लागू किया जाए।
2. वन विभाग द्वारा मैपिया राशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
3. हाथी प्रभावित क्षेत्रों को विशेष राहत पैकेज में शामिल किया जाए।
अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाता है। जैतहरी के ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज भोपाल तक पहुंचेगी और उन्हें भी बराबर की राहत मिलेगी।




































