- बटुरा में मजदूरों, पिकअप वाहनों और मशीनरी से कोयला निकालने का आरोप; अशोक तिवारी और विजय यादव की भूमिका पर उठे सवाल, मुख्य सरगना का नाम जल्द उजागर करने का दावा
- समाचार प्रकाशित होने और शिकायतें पहुंचने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार, थाने से कमिश्नर कार्यालय तक प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल
बटुरा/शहडोल। सोन नदी के किनारे कथित अवैध कोयला उत्खनन का मामला अब केवल खनिज संपदा की लूट के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी, शिकायतों पर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है शहडोल जिले के अमलाई थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बटुरा में बड़े पैमाने पर कोयला निकाले जाने और उसके परिवहन की शिकायतें सामने आ रही हैं स्थानीय लोगों का दावा है कि इस गतिविधि में बड़ी संख्या में मजदूरों, पिकअप वाहनों और मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है वीडियो में स्पष्ट रूप से मजदूर कोयला धो रहे हैं वह दिख रहा है कथित उत्खनन से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद भी यदि मौके पर प्रभावी जांच नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठेंगे
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में वास्तव में इतने बड़े स्तर पर कोयला उत्खनन और परिवहन हो रहा है, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली? और यदि जानकारी मिल चुकी है, तो अब तक कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
अशोक तिवारी और विजय यादव की भूमिका पर सवाल, जांच से ही खुलेगा सच
स्थानीय स्तर पर अशोक तिवारी और विजय यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं हालांकि, दोनों की संलिप्तता की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित एजेंसियां निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करें कि कथित उत्खनन में किन लोगों की क्या भूमिका है, कोयला कहां से निकाला जा रहा है, उसका परिवहन कौन कर रहा है और इसके लिए कोई वैध अनुमति है या नहीं
इस पूरे कथित नेटवर्क का मुख्य सरगना कौन है और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका है, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है इस मामले से जुड़े अन्य नाम और तथ्य प्रमाणों के सत्यापन के बाद जल्द प्रकाशित किए जाएंगे केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराने के बजाय जांच के जरिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है
खबरें प्रकाशित, शिकायतें पहुंचीं, फिर भी कार्रवाई कहां?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस मामले को पहले भी समाचार पत्रों के माध्यम से उठाया जा चुका है जिला प्रशासन, पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, आईजी और कमिश्नर स्तर तक शिकायतें पहुंचने की बात भी कही जा रही है इसके बावजूद यदि कथित गतिविधियां जारी हैं, तो यह स्थिति संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है
समाचार प्रकाशित होने और शिकायतें किए जाने के बाद भी यदि मौके पर जांच, कार्रवाई अथवा आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आता, तो जनता यह पूछने के लिए स्वतंत्र है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कर क्या रहे हैं? क्या शिकायतों की जांच की गई? क्या घटनास्थल का निरीक्षण हुआ? क्या कोयले के स्रोत और परिवहन में लगे वाहनों की पड़ताल की गई? यदि कार्रवाई हुई है, तो उसका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
सवाल सीधा है—शिकायतों के बाद भी यदि स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही, तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
थाने से कमिश्नर कार्यालय तक जवाबदेही तय हो
शहडोल जिले में केशवाही पुलिस थाना, जिला प्रशासन, खनिज विभाग और संभागीय स्तर के अधिकारियों के कार्यालय मौजूद हैं ऐसे में कथित अवैध उत्खनन की शिकायतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की बनती है यदि वीडियो और शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पता लगाना आवश्यक होगा कि गतिविधियां कब से चल रही थीं, किन लोगों ने इन्हें संचालित किया और संबंधित विभागों ने समय रहते क्या कदम उठाए
प्रशासन की चुप्पी को अपने आप मिलीभगत का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होना संदेह और सवालों को जरूर जन्म देता है इसलिए अधिकारियों को सामने आकर जांच की स्थिति बतानी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए
प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला से हस्तक्षेप की मांग
मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने शहडोल जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र शुक्ला से हस्तक्षेप की मांग की है मांग है कि खनिज, राजस्व, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर सोन नदी के किनारे कथित उत्खनन स्थल का निरीक्षण कराया जाए
जांच में कोयले के स्रोत, उत्खनन की वैधता, परिवहन में लगे वाहनों, संबंधित दस्तावेजों और कथित गतिविधियों से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल होनी चाहिए यदि अवैध उत्खनन या परिवहन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए साथ ही, जांच में सामने आए तथ्यों और की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके
वीडियो में दिख रही गतिविधियों की तकनीकी जांच जरूरी
सामने आए वीडियो में कोयला निकालने जैसी गतिविधियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है हालांकि, वीडियो की तारीख, सटीक स्थान, उसमें दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और गतिविधि की वैधता की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है संबंधित अधिकारियों को वीडियो की जांच कर यह निर्धारित करना चाहिए कि वास्तव में वहां क्या गतिविधि हो रही है और क्या उसके लिए आवश्यक अनुमति मौजूद है
यदि वीडियो में दिखाई गई गतिविधियां अवैध पाई जाती हैं, तो केवल मौके पर मौजूद मजदूरों के विरुद्ध कार्रवाई करके मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए जांच का दायरा उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो कथित तौर पर पूरी गतिविधि का संचालन, वित्तपोषण या परिवहन व्यवस्था संभाल रहे हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जानी चाहिए
अब कार्रवाई चाहिए, केवल आश्वासन नहीं
सोन नदी के किनारे कथित कोयला उत्खनन का मामला कई सीधे सवाल सामने रखता है क्या संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण करेंगे? क्या अशोक तिवारी और विजय यादव की भूमिका से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या कथित नेटवर्क के मुख्य संचालकों की पहचान की जाएगी? और क्या प्रशासन अपनी जांच तथा कार्रवाई का विवरण जनता के सामने रखेगा?
इन सवालों का जवाब केवल बयान जारी करने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और उसके परिणामों से मिलेगा यदि शिकायतें निराधार हैं, तो प्रशासन तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करे। यदि आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए
अब निगाहें प्रशासन और प्रभारी मंत्री पर हैं सोन नदी के किनारे कथित अवैध कोयला उत्खनन के मामले में सच्चाई सामने लाने, जिम्मेदारी तय करने और नियमानुसार कार्रवाई करने का समय आ गया है






































































