संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली पवित्र नगरी अमरकंटक में नवरात्रि में संध्या आरती के बाद वितरित किया जाने वाला साबूदाने से तैयार फलाहारी प्रसाद 1990 के दशक में शुरू हुई इस परंपरा को अब पूर्व पुजारियों के बेटे (पुत्र) पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं । प्रारंभ किया गया यह सेवा कभी 5 किलो से शुरू होने वाला प्रसाद अब प्रतिदिन सवा क्विंटल से डेढ़ क्विंटल तक तैयार किया जाता है । प्रसाद की शुद्धता को ध्यान में रखते हुए शुद्ध घी से बनी साबूदाने की खिचड़ी सबसे पहले मां नर्मदा को अर्पित कर श्रद्धालुओं में निःशुल्क बांटी जाती है ।
स्वयं के सहयोग से संचालन
इस सेवा में नर्मदा मंदिर ट्रस्ट या प्रशासन की आर्थिक मदद नहीं ली जाती , इसे मंदिर पुजारी परिवार और स्थानीय सेवाभावियों द्वारा चलाया जाता है ।
अमरकंटक के पवित्र नर्मदा मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं के लिए फलाहारी प्रसाद वितरण की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत है । मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी स्वर्गीय आशुतोष द्विवेदी (राजू महाराज) एवं स्वर्गीय सुशील द्विवेदी (सुंदर महाराज) द्वारा शुरू की गई इस सेवा को अब युवा पीढ़ी — अभिषेक , विनायक , प्रसन्न , श्रीयांक , विवेक , कार्तिकेय और दिव्यम द्विवेदी पूरी तल्लीनता से संभाल रहे है ।
व्रतधारी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू हुई यह सेवा आज आस्था और जनसेवा का एक बड़ा उदाहरण बन चुकी है , जिसे भविष्य में भी निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया है ।






































































