रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में जय अंबे कंपनी पर गंभीर सवाल

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  •  380 श्रमिकों के लाइसेंस पर 700 से अधिक कर्मचारियों से काम कराने का आरोप
  • श्रम विभाग की अनुमति और वास्तविक कर्मचारियों की संख्या में बड़ा अंतर? दस्तावेज सामने आने के बाद शासन-प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

अनूपपुर। रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कार्यरत जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कंपनी के खिलाफ स्थानीय स्तर पर पहले से ही रोजगार, वेतन भुगतान, एचपीसी दर और श्रमिकों के कथित शोषण को लेकर शिकायतें उठती रही हैं। अब कंपनी के श्रम लाइसेंस को लेकर एक नया और गंभीर मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी एवं उपलब्ध बताए जा रहे दस्तावेजों के अनुसार, जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को श्रम विभाग की ओर से जारी लेबर लाइसेंस में कथित तौर पर मात्र 380 श्रमिकों को नियोजित करने की अनुमति दी गई है। जबकि रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में कंपनी के माध्यम से 700 से अधिक कर्मचारियों के कार्य करने की बात सामने आ रही है। यदि दस्तावेजों में दर्ज अनुमति और वास्तविक कर्मचारियों की संख्या में यह अंतर सही पाया जाता है, तो यह श्रम विभाग के नियमों और लाइसेंस की शर्तों के अनुपालन को लेकर गंभीर जांच का विषय है।

आखिर 380 की अनुमति पर 700 से अधिक कर्मचारी कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब श्रम विभाग द्वारा निर्धारित संख्या में कर्मचारियों की अनुमति दी गई है, तो उससे अधिक श्रमिकों से किस आधार पर काम कराया जा रहा है? क्या कंपनी ने कर्मचारियों की बढ़ी हुई संख्या के संबंध में श्रम विभाग से संशोधित अनुमति प्राप्त की है? यदि अनुमति नहीं ली गई है, तो अब तक संबंधित विभागों द्वारा निरीक्षण और कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंपनी के कुछ दस्तावेजों पर सुहागपुर सब एरिया मैनेजर श्री संदीप शर्मा और अर्जुन जोड़ के हस्ताक्षर होने की बात भी सामने आई है। इन दस्तावेजों की वास्तविकता और उनमें दर्ज विवरण की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

जिम्मेदारी तय कौन करेगा?

रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में भारी मशीनों और बड़ी संख्या में श्रमिकों के साथ खनन कार्य संचालित हो रहा है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की दुर्घटना, श्रमिक की मृत्यु या गंभीर हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या श्रमिकों की वास्तविक संख्या, उनकी सुरक्षा व्यवस्था, बीमा, पीएफ और अन्य वैधानिक सुविधाओं का सही रिकॉर्ड रखा जा रहा है?

बताया जा रहा है कि कंपनी का संबंधित लेबर लाइसेंस कंपनी के मालिक जोगिंदर सिंह के नाम पर जारी हुआ है। उनके संबंध में भी विभिन्न मामलों की जानकारी होने का दावा किया जा रहा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर जांच होनी चाहिए।

शासन-प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

अब सवाल यह है कि श्रम आयुक्त कार्यालय, जिला प्रशासन, खनन प्रबंधन और संबंधित विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। श्रम विभाग को कंपनी के वास्तविक कर्मचारियों की संख्या, जारी लाइसेंस, वेतन रजिस्टर, उपस्थिति पंजी, पीएफ रिकॉर्ड और सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों का मिलान कराना चाहिए।

स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि जय अंबे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब सवाल सीधे शासन-प्रशासन से है—क्या 380 श्रमिकों की अनुमति पर 700 से अधिक कर्मचारियों के काम करने के आरोप की जांच होगी, या फिर रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में नियमों की अनदेखी का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?

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