मुख्यमंत्री के आदेश की खुलेआम धज्जियां! किसानों से डीजल देने के नाम पर 200 रुपये की अवैध वसूली का आरोप

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शहडोल | अरुण द्विवेदी की विशेष रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल पंपों से ट्रैक्टर में ही डीजल देने की अनिवार्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। अब किसान अपनी जरूरत के अनुसार केन, डिब्बे और कुप्पों में भी आसानी से डीजल खरीद सकते हैं।

 

लेकिन मुख्यमंत्री के इस फैसले के बावजूद शहडोल जिले में कुछ पेट्रोल पंप संचालक और उनके कर्मचारी सरकार के आदेश को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं।

 

आरोप है कि किसानों से केन या डिब्बे में डीजल देने के एवज में 200 रुपये अतिरिक्त मांगे जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यह किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर की जा रही अवैध वसूली नहीं है? क्या इसे डीजल की कालाबाजारी या मनमानी नहीं कहा जाएगा?

 

ऐसा ही एक मामला शहडोल जिला मुख्यालय के पांडव नगर रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर सामने आया। यहां डीजल लेने पहुंचे एक किसान ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने डिब्बे में डीजल देने के लिए उससे 200 रुपये अतिरिक्त मांगे। किसान द्वारा अतिरिक्त पैसे देने से इनकार करने पर उसे एक बूंद डीजल तक नहीं दिया गया।

 

परेशान किसान ने अपनी आपबीती वरिष्ठ पत्रकार अरुण द्विवेदी को बताई। सूचना मिलते ही पत्रकार अरुण द्विवेदी मौके पर पहुंचे और स्वयं पेट्रोल पंप पर जाकर पूरे मामले की जानकारी ली। इस दौरान वहां मौजूद कर्मचारियों से भी सवाल किए गए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री ने किसानों की सुविधा के लिए स्पष्ट आदेश जारी कर दिए हैं, तो फिर कुछ पेट्रोल पंपों पर खुलेआम मनमानी क्यों की जा रही है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर किसानों का शोषण इसी तरह जारी रहेगा?

फिलहाल पूरे जिले की नजर प्रशासन पर टिकी है। देखना होगा कि किसानों से कथित अवैध वसूली करने वाले पेट्रोल पंप संचालकों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

 

देखिए वरिष्ठ पत्रकार अरुण द्विवेदी की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

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