मिशन एडमिशन: सही विषय का चयन ही सफल करियर की पहली सीढ़ी, समाजशास्त्र बन रहा युवाओं की पहली पसंद

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मिशन एडमिशन: सही विषय का चयन ही सफल करियर की पहली सीढ़ी, समाजशास्त्र बन रहा युवाओं की पहली पसंद

अनूपपुर। उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू होते ही विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न सही विषय के चयन का होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में केवल महाविद्यालय में प्रवेश लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप विषय का चयन करना सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है।

समाजशास्त्र विभाग की डॉ. तरन्नुम सरवत एवं समाजशास्त्री डॉ. ध्रुव कुमार दीक्षित ने कहा कि 21वीं सदी तकनीकी विकास, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का युग है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को बिना उचित करियर काउंसलिंग के विषय का चयन नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि जानकारी के अभाव में अनेक विद्यार्थी प्रवेश के प्रथम चरण से वंचित रह जाते हैं, जबकि कई छात्र-छात्राएं बिना पर्याप्त जानकारी के किसी भी विषय में प्रवेश लेकर अपने भविष्य से समझौता कर बैठते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी विषय छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि प्रत्येक विषय की अपनी उपयोगिता होती है। आवश्यकता इस बात की है कि विद्यार्थी ऐसा विषय चुनें जो उनके व्यक्तित्व, रुचि और भविष्य की संभावनाओं के अनुरूप हो। समाजशास्त्र ऐसा ही एक विषय है, जिसकी उपयोगिता वर्तमान समय में लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार समाजशास्त्र केवल समाज का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह मानव व्यवहार, सामाजिक संस्थाओं, संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक संरचना तथा समकालीन चुनौतियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का माध्यम है। बदलते सामाजिक परिवेश में यह विषय शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, प्रशासन, न्याय व्यवस्था, मीडिया, प्रबंधन, पर्यटन, खेल, जनसंपर्क, सामाजिक अनुसंधान तथा नीति निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करा रहा है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू होने के बाद समाजशास्त्र का महत्व और अधिक बढ़ गया है। नई शिक्षा नीति बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और कौशल आधारित शिक्षण पर बल देती है, जिससे समाजशास्त्र अब केवल अध्ययन-अध्यापन तक सीमित न रहकर शोध, नवाचार, सामाजिक नेतृत्व और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।

डॉ. सरवत एवं डॉ. दीक्षित ने कहा कि समाजशास्त्र का अध्ययन विद्यार्थियों में तार्किक सोच, विश्लेषण क्षमता, नेतृत्व कौशल, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करता है। यही कारण है कि आज यह विषय युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।

उन्होंने बताया कि समाजशास्त्र में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए सिविल सेवा, न्यायिक सेवा, शिक्षण, शोध, सामाजिक कार्य, डिजिटल मीडिया, नर्सिंग, विधि, प्रबंधन, पर्यटन, जनसंपर्क, गैर-सरकारी संगठन, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) तथा विकास योजनाओं सहित अनेक क्षेत्रों में रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं।

देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में समाजशास्त्र अध्ययन के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रमुख केंद्र हैं। वहीं मध्यप्रदेश में पीएम एक्सीलेंस महाकौशल महाविद्यालय जबलपुर, एक्सीलेंस कॉलेज भोपाल, हमीदिया कॉलेज भोपाल, सरोजिनी नायडू महाविद्यालय भोपाल, अटल बिहारी कॉलेज इंदौर, माधव महाविद्यालय उज्जैन तथा टीआरएस कॉलेज रीवा सहित कई संस्थानों में समाजशास्त्र की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, विक्रम विश्वविद्यालय, महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय भी इस विषय के प्रमुख अध्ययन केंद्र हैं।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल भीड़ का अनुसरण न करें, बल्कि अपने व्यक्तित्व, रुचि और करियर की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए विषय का चयन करें। उनका कहना है कि समाजशास्त्र ऐसा विषय है जो ज्ञान, संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता और रोजगार के अवसरों का संतुलित समन्वय प्रदान करता है। समाज को समझने वाला विद्यार्थी ही भविष्य में एक सक्षम नागरिक, प्रभावी नेतृत्वकर्ता और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला व्यक्तित्व बन सकता है।

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