क्या थानों की बंद दरवाजों वाली कार्यशैली से तय हो रही है धमकियों की संस्कृति?

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  •  आम नागरिकों के जरिए संदेश भिजवाने की प्रवृत्ति पर उठते बड़े सवाल

शहडोल (दीपक द्विवेदी )जैतपुर:लोकतंत्र में पुलिस और जनता के बीच का रिश्ता विश्वास, सुरक्षा और संवाद का होना चाहिए। लेकिन जब थानों के भीतर न्याय की गुहार लगाने आने वाले आम नागरिकों के सामने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल होने लगे, तो व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। शहडोल जिले के जैतपुर क्षेत्र से एक ऐसा ही चिंताजनक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां थानों की कार्यशैली और वहां दी जा रही धमकियों को लेकर गंभीर चर्चाएं हैं।

  • आम नागरिकों के जरिए परोक्ष संदेश और धमकियां

सूत्रों और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, थानों में जब आम लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं, तो कुछ मामलों में उन्हें खुलेआम यह सीख दी जा रही है कि वे मीडिया या अन्य माध्यमों से दूरी बनाकर रखें। हद तो तब हो जाती है जब मीडिया की गैर-मौजूदगी में आम नागरिकों के मार्फत पत्रकारों को निशाना बनाकर बेहद अमर्यादित और धमकीभरी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है और यह संदेश भिजवाया जाता है कि वे इस तरह की धमकियों से डर जाएं।

  • क्या पारदर्शिता से घबरा रहा है मैदानी अमला?

पत्रकारिता जगत और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि पुलिस का काम अपराध और अपराधियों पर नकेल कसना है, न कि अपने पद का रौब दिखाकर उन लोगों को डराना जो समाज की सच्चाइयों को सामने लाते हैं। यदि थानों में इस तरह की ‘दबाव और धमकी की संस्कृति’ को बढ़ावा मिलेगा, तो आम आदमी अपनी आवाज उठाने से डरेगा और पुलिस-जनता का भरोसा टूटेगा। जब संवाद के नाम पर इस स्तर की भाषा का सहारा लिया जाने लगे, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि कहीं न कहीं पारदर्शिता से बचने की कोशिश की जा रही है।
उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगी बात

क्षेत्रीय स्तर पर इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि वर्दी की आड़ में इस तरह की तानाशाही भाषा और धमकियों का चलन किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। बहुत जल्द इस पूरी कार्यशैली और मैदानी अमले के रवैये से जिले के उच्च अधिकारियों (पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक) को अवगत कराया जाएगा, ताकि ऐसे तत्वों पर लगाम लगाई जा सके और थानों की गरिमा सुरक्षित रहे।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इस तरह की ओछी हरकतों और धमकियों से न कभी दबाया जा सका है, और न ही दबाया जा सकता है। APR News आम जनता के अधिकारों और प्रशासनिक पारदर्शिता की इस लड़ाई को पूरी मजबूती के साथ आगे भी उठाता रहेगा।

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