करैत सर्प के डसने से युवक की मौत, उपचार के दौरान जिला अस्पताल में तोड़ा दम
कोयलांचल समाचार के लिए रिपोर्टर शशिधर अग्रवाल
अनूपपुर। जिले के राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत हर्रई के गिरारी गांव में करैत प्रजाति के अत्यंत जहरीले सर्प के काटने से 40 वर्षीय युवक की उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में शोक का माहौल है, वहीं जिला अस्पताल पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई कर मामले की सूचना संबंधित थाना को भेज दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गिरारी गांव निवासी छंगू अगरिया पिता मनीराम अगरिया (40 वर्ष) सोमवार को प्रतिदिन की भांति लोहे के औजार एवं अन्य सामान बनाने का कार्य कर देर शाम अपने घर लौटे थे। रात में भोजन करने के बाद वे घर के अंदर जमीन पर सो गए। इसी दौरान सोमवार और मंगलवार की मध्यरात्रि करैत प्रजाति के जहरीले सर्प ने उनके दाएं हाथ की बीच वाली उंगली में डस लिया।
सर्पदंश की जानकारी मिलने पर परिजन तत्काल उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजेंद्रग्राम लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला चिकित्सालय अनूपपुर रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा लगातार उपचार किया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर मंगलवार दोपहर उनकी मृत्यु हो गई।
मृत्यु की सूचना ड्यूटी डॉक्टर डॉ. नितेश वर्मा द्वारा जिला अस्पताल पुलिस चौकी को दी गई। सूचना मिलते ही प्रधान आरक्षक मंसाराम सिंह मार्को ने अस्पताल पहुंचकर मृतक के शव का पंचनामा तैयार किया तथा पोस्टमार्टम की कार्रवाई कराई। इसके बाद शव परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। चूंकि घटना राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र की है, इसलिए अग्रिम जांच के लिए संबंधित थाना को सूचित कर दिया गया है।
गौरतलब है कि गर्मी के मौसम में विभिन्न प्रजातियों के सर्प अपने बिलों और प्राकृतिक आवासों से बाहर निकलकर भोजन एवं पानी की तलाश में खेतों, गांवों तथा घरों के आसपास पहुंच जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार करैत भारत के सबसे विषैले सर्पों में से एक माना जाता है, जिसका विष तंत्रिका तंत्र पर तेजी से प्रभाव डालता है।
जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों एवं सर्प विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि गर्मी के मौसम में घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, रात में जमीन पर सोने से बचें तथा सर्प दिखाई देने पर उसे पकड़ने या छेड़ने का प्रयास न करें। सर्पदंश की स्थिति में तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय उपचार लेना ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी उपाय है।




































