कल्याण भवन (एचआरडी) में आज कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत खनन प्रबंधकों एवं ब्लास्टिंग अधिकारियों के लिए ‘ब्लास्टिंग टेक्निक्स फॉर बीसीसीएल माइंस’ विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीसीसीएल एवं खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को सुरक्षित एवं नियंत्रित ब्लास्टिंग, वैधानिक प्रावधानों, निर्धारित प्रक्रियाओं एवं SOPs तथा नवीनतम ब्लास्टिंग तकनीकों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। विभिन्न क्षेत्रों से 60 से अधिक अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए। विभिन्न ब्लास्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी तकनीकी प्रस्तुतियों के माध्यम से नवीनतम तकनीकों एवं कार्यप्रणालियों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में निदेशक (मानव संसाधन) श्री मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री संजय कुमार सिंह, डीएमएस (रीजन-1, सेंट्रल जोन), डीजीएमएस श्री टॉम मैथ्यू, डीएमएस (रीजन-2, सेंट्रल जोन) श्री जी. संजय कुमार, डीडीएमएस श्री राहुल पुरोहित, डीडीएमएस श्री रौनक मंडल, महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुधाकर प्रसाद, महाप्रबंधक (आईडी), बीसीसीएल श्री एम.आर. श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में निदेशक (मानव संसाधन) श्री मुरली कृष्ण रमैया ने कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों से तकनीकी सत्रों में सक्रिय सहभागिता के साथ विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारी को अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया। निदेशक (तकनीकी/संचालन) श्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में बीसीसीएल की अधिकांश खदानों की स्थिति के कारण यहां खनन कार्यों की चुनौतियां अधिक हैं और ऐसे में सुरक्षित एवं नियंत्रित ब्लास्टिंग का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने ब्लास्टिंग से संबंधित सभी निर्धारित प्रक्रियाओं, SOPs एवं दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन तथा ब्लास्टिंग रिकॉर्ड के व्यवस्थित संधारण पर जोर दिया। उन्होंने प्रशिक्षण से प्राप्त तकनीकी ज्ञान के व्यावहारिक क्रियान्वयन के माध्यम से सुरक्षित एवं संरक्षित खनन को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।
डीएमएस श्री जी. संजय कुमार ने बीसीसीएल के खनन क्षेत्रों में सुरक्षित ब्लास्टिंग के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों एवं वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन पर बल देते हुए कहा कि प्रक्रियागत अनुशासन, सतर्कता एवं प्रभावी निगरानी सुरक्षित ब्लास्टिंग के प्रमुख आधार हैं।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में डीएमएस श्री टॉम मैथ्यू ने विस्फोटकों के सुरक्षित भंडारण, परिवहन, उपयोग एवं हैंडलिंग, सुरक्षित ब्लास्टिंग प्रथाओं, इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर के उपयोग, डीप-होल ब्लास्टिंग, ड्रिलिंग एवं ओपनकास्ट खनन में सुरक्षित ब्लास्टिंग, ब्लास्टिंग रिकॉर्ड के संधारण, डीप-होल ब्लास्टिंग में आवश्यक सावधानियों तथा फायर एरिया में ब्लास्टिंग से संबंधित गजट अधिसूचना सहित विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में सिंफर के डॉ. सी. सॉमलियाना ने रॉक एक्सकेवेशन एवं ब्लास्टिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपने विशेषज्ञ अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रभावी एवं नियंत्रित ब्लास्टिंग के लिए बेहतर योजना, ड्रिलिंग-ब्लास्टिंग के समन्वय, कार्यस्थल की परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी दृष्टिकोण तथा निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला। दोनों सत्रों में प्रतिभागियों के प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया।
कार्यक्रम का समापन महाप्रबंधक (एचआरडी) श्री सुधाकर प्रसाद द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। मंच संचालन एचआरडी की सुश्री देवांशी जैन ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुमित कुमार एवं अन्य का विशेष योगदान रहा।

































































