खनिज माफिया-पुलिस गठजोड़ के आरोपों से मचा हड़कंप, करोड़ों के राजस्व नुकसान की जांच की मांग

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खनिज माफिया-पुलिस गठजोड़ के आरोपों से मचा हड़कंप, करोड़ों के राजस्व नुकसान की जांच की मांग

जन क्रांति सामाजिक संस्था ने मुख्यमंत्री, डीजीपी और खनिज आयुक्त को भेजी शिकायत; उच्च स्तरीय जांच दल गठित करने की मांग

अनूपपुर। जिले के कोयलांचल क्षेत्र में अवैध रेत खनन, परिवहन और भंडारण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जन क्रांति सामाजिक संस्था के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, खनिज आयुक्त, संभाग आयुक्त शहडोल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि कोतमा, बिजुरी, राजनगर एवं भालूमाड़ा क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है, जिससे शासन को प्रतिमाह लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

शिकायत में दावा किया गया है कि पुलिस एवं खनिज विभाग की कथित निष्क्रियता के कारण रेत माफिया बेखौफ होकर नदी घाटों से अवैध उत्खनन कर रहे हैं। संस्था के अनुसार केवई नदी, कनई नदी तथा आसपास के कई क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में रेत का अवैध परिवहन किया जाता है। आरोप है कि रात के समय ट्रैक्टरों एवं छोटे मालवाहक वाहनों के माध्यम से रेत का परिवहन किया जाता है तथा कई वाहनों में नंबर प्लेट तक नहीं लगी होती।

संस्था ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र में कई स्थानों पर बिना वैध दस्तावेजों एवं ई-टीपी के रेत का भंडारण किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि संबंधित स्थलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अवैध रेत कारोबार के कारण शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है, वहीं पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि अवैध गतिविधियों के विरुद्ध आवाज उठाने वाले लोगों को कथित रूप से धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ता है। संस्था ने कुछ पुराने घटनाक्रमों का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

जन क्रांति सामाजिक संस्था ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम गठित की जाए, संबंधित नदी घाटों, अवैध भंडारण स्थलों एवं परिवहन मार्गों का निरीक्षण कराया जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर उठे इन आरोपों से प्रशासनिक महकमे में चर्चा का माहौल है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत के बाद संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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