अनूपपुर -ओंकार सिंह
बैगा जनजाति के ग्रामीणों से योजनाओं के नाम पर वसूली का आरोप आशा कार्यकर्ता पर उठे गंभीर सवाल
संबल आधार श्रम कार्ड लाड़ली बहना से लेकर जन्म प्रमाण पत्र तक के नाम पर पैसे लेने का आरोप दस्तावेज मांगने पर डराने धमकाने की शिकायत कथित नेटवर्क की भी हो जांच
अनूपपुर/जैतहरी। जिले की जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत ओढ़ेरा के ग्राम अकुआ से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां बैगा जनजाति के ग्रामीणों ने एक आशा कार्यकर्ता सुघरतिया बाई पर विभिन्न शासकीय योजनाओं एवं जरूरी दस्तावेज बनवाने के नाम पर पैसे लेने के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद जब मीडिया टीम ने मामले की पड़ताल शुरू की तो कई ऐसे आरोप सामने आए जो स्वास्थ्य विभाग से लेकर स्थानीय प्रशासन तक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस आशा कार्यकर्ता को गांव की महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं में सहयोग की जिम्मेदारी दी गई है उसी के द्वारा कथित रूप से भोले भाले बैगा परिवारों से अलग अलग सरकारी योजनाओं और दस्तावेजों के नाम पर रकम ली गई।
*किसी से संबल तो किसी से लाड़ली बहना के नाम पर पैसे लेने का आरोप*
ग्रामीणों के अनुसार किसी से संबल योजना किसी से आधार कार्ड किसी से श्रम कार्ड किसी से लाड़ली बहना योजना किसी से बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र तो किसी से सुकन्या योजना से संबंधित काम कराने के नाम पर पैसे लिए जाने की शिकायत है।
आरोप यह भी है कि यह रकम मामूली नहीं है और कई ग्रामीणों से अलग अलग समय पर राशि ली गई। अब ग्रामीण अपने दस्तावेज अथवा दिए गए पैसों का हिसाब मांग रहे हैं तो कथित रूप से उन्हें डराने धमकाने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
*क्या अकेले चल रहा था खेल या पीछे है पूरा नेटवर्क?*
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्रामीणों के आरोप सही हैं तो क्या एक आशा कार्यकर्ता अकेले इतने अलग अलग विभागों से संबंधित योजनाओं और दस्तावेजों के नाम पर पैसे ले रही थी या इसके पीछे अन्य लोगों का भी कोई नेटवर्क सक्रिय है
मीडिया की पड़ताल में सामने आए आरोपों को देखते हुए इस पूरे मामले की केवल विभागीय खानापूर्ति के बजाय निष्पक्ष और विस्तृत जांच की आवश्यकता है। यह भी जांच का विषय है कि ग्रामीणों से किस किस काम के नाम पर कितनी राशि ली गई राशि किसके पास गई कौन कौन लोग इस प्रक्रिया में शामिल थे और संबंधित दस्तावेज वास्तव में बने भी या नहीं।
*बैगा परिवारों से वसूली हुई तो मामला बेहद गंभीर*
बैगा जनजाति विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल है। ऐसे में यदि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने अथवा जरूरी दस्तावेज बनवाने के नाम पर उनसे अवैध रूप से पैसे लिए गए हैं तो मामला और भी गंभीर हो जाता है।
प्रशासन को संबंधित ग्रामीणों के बयान दर्ज कर प्रत्येक शिकायत का अलग अलग सत्यापन करना चाहिए। जिन ग्रामीणों ने राशि देने की बात कही है उनसे राशि तारीख योजना और उपलब्ध साक्ष्यों की जानकारी लेकर जांच की जाए। साथ ही संबंधित आशा कार्यकर्ता का पक्ष भी दर्ज किया जाए ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके।
*कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग*
अब सवाल जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने है क्या ग्राम अकुआ के बैगा परिवारों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी क्या कथित रूप से ली गई राशि का पूरा हिसाब सामने आएगा और यदि किसी नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो क्या उसके प्रत्येक सदस्य तक कार्रवाई पहुंचेगी मामले में ग्रामीणों के आरोपों की सत्यता निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी। संबंधित आशा कार्यकर्ता एवं जिम्मेदार विभाग का पक्ष भी लिया जाना आवश्यक है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवारों की राशि वापस दिलाने की कार्रवाई भी होनी चाहिए। यह मामला केवल कुछ रुपयों की कथित वसूली का नहीं बल्कि उन बैगा परिवारों के भरोसे का भी है जिनके लिए शासन करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है।






























































