शासकीय कुएं की ढलाई में स्कूली बच्चे अकुआ में बाल श्रम की तस्वीरों ने खड़े किए गंभीर सवाल

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शासकीय कुएं की ढलाई में स्कूली बच्चे अकुआ में बाल श्रम की तस्वीरों ने खड़े किए गंभीर सवाल

जिन हाथों में होनी चाहिए किताबें उन हाथों से कराया जा रहा निर्माण कार्य जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर सवाल

ओंकार सिंह की रिपोर्ट

अनूपपुर। जिले के जैतहरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत ओढेरा के ग्राम अकुआ से सामने आई तस्वीरों ने सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी और बाल श्रम रोकने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से संबंधित बताए जा रहे कुआं निर्माण कार्य के दौरान कथित रूप से स्कूली उम्र के बच्चे निर्माण कार्य में लगे दिखाई दिए। स्थानीय जानकारी के अनुसार उक्त निर्माण कार्य ठेकेदार महेंद्र पटेल द्वारा कराया जा रहा था। सामने आई तस्वीर में निर्माण स्थल पर कम उम्र के बच्चे दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि इनमें स्कूली छात्राएं भी निर्माण कार्य में लगी थीं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन बच्चों को इस उम्र में स्कूल की कक्षा में बैठकर पढ़ाई करनी चाहिए वे सरकारी निर्माण स्थल तक कैसे पहुंचे और उनसे काम किसकी अनुमति तथा किसकी निगरानी में कराया गया?

एक तरफ बाल श्रम रोकने के दावे दूसरी तरफ सरकारी काम में बच्चे

सरकार द्वारा बाल श्रम रोकने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि शासकीय निर्माण कार्य में नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराई गई तो यह मामला केवल एक ठेकेदार की लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि संबंधित विभाग की मैदानी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

बैगा बाहुल्य और जंगल क्षेत्र होने का उठाया जा रहा फायदा

ग्राम अकुआ बैगा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बताया जाता है और अंदरूनी जंगल क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां विभागीय अधिकारियों की नियमित निगरानी को लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। सवाल यह है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों का निरीक्षण कौन कर रहा है कार्यस्थल पर मजदूर कौन हैं सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं और निर्माण निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो रहा है या नहीं इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है यदि दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण नहीं होता है तो ऐसी परिस्थितियां गंभीर चिंता का विषय हैं। विशेषकर बैगा समुदाय के बच्चों की शिक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन को अतिरिक्त संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता है।

कलेक्टर से जांच की मांग बच्चों की पहचान सार्वजनिक किए बिना हो कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन श्रम विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग शिक्षा विभाग तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को संयुक्त रूप से मौके पर जांच करानी चाहिए। जांच में बच्चों की उम्र स्कूल में उनका नामांकन और उपस्थिति निर्माण स्थल पर उनकी मौजूदगी का कारण तथा उनसे वास्तव में मजदूरी कराई गई या नहीं इन सभी तथ्यों की निष्पक्ष पुष्टि की जानी चाहिए यदि बाल श्रम के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति अथवा ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के साथ संबंधित विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यही है अकुआ के बच्चों के हाथों में किताब कॉपी होगी या सरकारी निर्माण कार्य के तसले अब जवाब प्रशासन को देना है।

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