ग्राम पंचायत पायरी क्रमांक-1 में खेत तालाब योजना के तहत बिना खुदाई किए 50 हजार रुपये निकालने के मामले में अब पंचायत सचिव की भूमिका पूरी तरह से बेनकाब हो गई है। बिना भौतिक सत्यापन के सरकारी खजाने से राशि का आहरण सीधे तौर पर सचिव और सरपंच की मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।
इस खुलासे के बाद ग्रामीणों ने दोषी पंचायत सचिव पर तत्काल और कठोर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
भुगतान का जिम्मेदार कौन?
नियमानुसार पंचायत स्तर पर किसी भी निर्माण कार्य का मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन होने के बाद ही राशि का भुगतान किया जाता है। इसके लिए पंचायत सचिव सीधे तौर पर जिम्मेदार होता है। सवाल यह है कि जब मौके पर न तो कोई गड्ढा खुदा और न ही तालाब का कोई अस्तित्व है, तो फिर सचिव ने किस आधार 50 हजार रुपये का भुगतान जारी कर दिया? यह स्पष्ट रूप से पदीय दुरुपयोग और सरकारी राशि के गबन (धोखाधड़ी) का मामला है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
तत्काल प्रभाव से निलंबन: ग्रामीणों की मांग है कि जनपद और जिला प्रशासन तत्काल संज्ञान लेते हुए भ्रष्ट पंचायत सचिव को निलंबित करे, ताकि वह आगे के रिकॉर्ड के साथ कोई छेड़छाड़ न कर सके।
FIR दर्ज हो: सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और फर्जी बिलों के आधार पर राशि निकालने के जुर्म में सचिव और अन्य दोषियों के गबन का आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाए।
राशि की रिकवरी: योजना के नाम पर निकाली गई 50 हजार रुपये की राशि दोषियों से ब्याज सहित वसूल (Recovery) की जाए।
जनपद और जिला प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इतने स्पष्ट प्रमाण सामने होने के बावजूद ब्लॉक और जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी संदेह पैदा करती है। यदि पंचायत सचिव पर जल्द ही कोई ठोस और दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो ग्रामीण जनपद पंचायत और कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने को मजबूर होंगे।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुले भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए पंचायत सचिव पर कार्रवाई का डंडा चलाता है, या फिर उसे बचाने की कोशिशें जारी रहती हैं।



































