काली श्रम संहिताओं की प्रतियां जलाकर श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन

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सीटू के नेतृत्व में जमुना-कोतमा हसदेव क्षेत्र में “राष्ट्रीय मांग दिवस” पर गूंजा श्रमिक अधिकारों का स्वर

 

अनूपपुर। केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) और उनसे संबंधित नियमों को अधिसूचित किए जाने के विरोध में मंगलवार को अनूपपुर जिले के जमुना-कोतमा एवं हसदेव क्षेत्र में श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। सीटू (CITU) के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन के दौरान श्रमिकों ने काली श्रम संहिताओं एवं नियमों की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन देशव्यापी “राष्ट्रीय मांग दिवस” के आह्वान के तहत आयोजित किया गया।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कोयला खदानों, औद्योगिक इकाइयों एवं अन्य क्षेत्रों में कार्यरत संविदा और नियमित श्रमिक शामिल हुए। श्रमिकों ने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताते हुए कहा कि नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के वर्षों पुराने अधिकारों को समाप्त करने का प्रयास हैं। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने नारेबाजी करते हुए श्रम कानूनों की बहाली और मजदूर हितों की रक्षा की मांग उठाई।

सभा को संबोधित करते हुए सीटू नेताओं ने कहा कि वर्तमान समय में लगातार बढ़ती महंगाई, रोजगार की अस्थिरता और श्रमिक अधिकारों पर हो रहे हमलों से मजदूर वर्ग गहरे संकट में है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका प्रथा को बढ़ावा देकर श्रमिकों का आर्थिक और सामाजिक शोषण किया जा रहा है, जबकि स्थायी कार्य कराने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए लेबर कोड से श्रमिकों के कार्य घंटे बढ़ेंगे, यूनियन गतिविधियों पर असर पड़ेगा और मालिकों को मनमानी छंटनी की छूट मिलेगी। इसलिए श्रमिक संगठनों की मांग है कि इन श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए और पुराने सुरक्षात्मक श्रम कानूनों को बहाल किया जाए।

श्रमिकों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन के दौरान श्रमिक संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से रखा। इनमें सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह निर्धारित करने, संविदा प्रथा समाप्त कर श्रमिकों का नियमितीकरण करने, समान कार्य के लिए समान वेतन लागू करने, 8 घंटे कार्यदिवस सुनिश्चित करने तथा ओवरटाइम का दोगुना भुगतान देने की मांग प्रमुख रही।

इसके अलावा रसोई गैस एवं खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाने, कार्यस्थलों पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को लागू करने तथा ट्रेड यूनियन नेताओं पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों को वापस लेने की मांग भी उठाई गई।

नेताओं ने सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

सभा में मौजूद श्रमिक नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने मजदूरों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।

बड़ी संख्या में श्रमिक नेता और कर्मचारी रहे उपस्थित

कार्यक्रम का नेतृत्व सीटू के जिला अध्यक्ष रामू यादव एवं महासचिव इंद्रपती सिंह ने किया। इस अवसर पर कोयला श्रमिक संघ सीटू जमुना-कोतमा क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष अनिल शर्मा, उपाध्यक्ष उत्तम तिवारी, सहायक सचिव प्रमोद कुमार, इंटक के महामंत्री मोहन पांव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिनिधि सुनीता विश्वकर्मा, समीम अख्तर सहित बड़ी संख्या में श्रमिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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