- महामंडलेश्वर स्वामी रामभूषण दास जी महाराज के सानिध्य में हुआ पूजन-अर्चन , भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन
संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय
अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित शांति कुटी आश्रम के संस्थापक जय जय सियाराम बाबा साहब की 54वीं पुण्यतिथि शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर इंदौर के राऊ स्थित हनुमान सदन में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई । श्रीमहंत स्वामी रामभूषण दास जी महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक समारोह में बड़ी संख्या में शिष्य , भक्त एवं श्रद्धालु शामिल हुए । आश्रम परिसर को फूलों और आकर्षक रोशनी से सजाया गया , जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आ रहा था ।
पूजन-अर्चन और भजन-कीर्तन से भक्तिमय हुआ आश्रम
कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर में विराजमान हनुमान लला जी की आरती एवं पूजन के साथ हुआ । इसके पश्चात जय जय सियाराम बाबा साहब की प्रतिमा के समक्ष ब्राह्मणों द्वारा विधिवत पूजन-अर्चन , आरती और स्तुति की गई । उपस्थित श्रद्धालुओं ने बाबा साहब को नमन करते हुए उनके जीवन , तपस्या , आध्यात्मिक साधना और समाजसेवा को स्मरण किया । इस अवसर पर बाबा साहब के परम शिष्य भी उपस्थित रहे । अपने गुरु का स्मरण करते हुए वे भावुक हो उठे ।
इसके बाद भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन प्रारंभ किया गया । भजनों की मधुर स्वर लहरियों से हनुमान सदन का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिरस से सराबोर हो गया । कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को भंडारे की प्रसादी वितरित की गई ।

त्याग , तपस्या और सेवा के प्रतीक थे बाबा साहब
श्रीमहंत स्वामी रामभूषण दास जी महाराज ने बताया कि जय जय सियाराम बाबा साहब की पुण्यतिथि प्रतिवर्ष शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है । अमरकंटक , महेश्वर और इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर उनके अनुयायी धार्मिक आयोजन कर बाबा साहब के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं । हनुमान सदन इंदौर और शांति कुटी आश्रम अमरकंटक में आयोजित होने वाले समारोहों में शिष्य , भक्त , श्रद्धालु एवं क्षेत्रवासी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं ।
स्वामी रामभूषण दास जी महाराज ने कहा कि बाबा साहब का जीवन त्याग , तपस्या , सेवा और आध्यात्मिक साधना का प्रेरणादायी उदाहरण है । उनके विचार और जीवन दर्शन आज भी श्रद्धालुओं को धर्म , सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं ।
समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा साहब का भावपूर्ण स्मरण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया । कई भक्तों ने उनसे जुड़े अपने अनुभव साझा किए और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया । पूजन-अर्चन , आरती , भजन-कीर्तन और भंडारे के साथ यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा , उल्लास एवं आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ ।







































































