खटखरिया तालाब के पास अवैध रूप से डम्प किया जा रहा मुरुम , जिम्मेदारो ने साध रखी चुप्पी

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ब्यौहारी। खटखरिया तालाब के पास मुरुम की डंपिंग का मामला अब जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। हाइवा क्रमांक UP 95 B 4672 से खुलेआम मुरुम अनलोड कर डम्प किया जा रहा है। इसके बावजूद मौके पर कार्रवाई करने कोई अधिकारी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसी मार्ग से एसडीएम और तहसीलदार की गाड़ियां भी गुजरती है , लेकिन मुरुम डंपिंग को लेकर कार्यवाही करना तो दूर उस तरफ झाँकते भी नही है।

सबूत मौजूद, फिर भी ‘कल देखते हैं’ –

मामले को लेकर जब खनिज निरीक्षक से संपर्क किया गया, तो उनके द्वारा ‘कल देखने की बात कही गयी ।’ अधिकारी का यह कथन किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं , लेकिन कार्रवाई की समयसीमा पर सवाल जरूर खड़ा करता है। आखिर मौके का निरीक्षण कब होगा? हाइवा में लदी मुरुम कहां से आई? क्या उसके परिवहन के लिए वैध दस्तावेज हैं? क्या संबंधित स्थल पर भंडारण की अनुमति है? इन सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी खनिज विभाग की है। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो दस्तावेज सामने रखकर स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?

एसडीएम-तहसीलदार भी निकलते है फिर भी कार्रवाई का इंतजार –

इस मामले में राजस्व विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक, जिस मार्ग पर मुरुम डंपिंग हो रहा है, वहां से एसडीएम और तहसीलदार के वाहन गुजरते है । इसके बावजूद पता नहीं क्यों उस पर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही क्या अभी तक उस पर इनकी नजर नहीं पड़ी या फिर जानबूझ कर नजर अंदाज करते हुए चुप्पी साधे हुए है। आखिर ब्यौहारी में नियमों की जांच का पैमाना क्या है? आम आदमी के मामले में विभाग कितनी तेजी दिखाता है और खनिज परिवहन जैसे मामलों में कार्रवाई की रफ्तार क्या रहती है? इन सवालों का जवाब विभागीय निरीक्षण और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही मिल सकता है।

हाइवा किसका? मुरुम कहां से आई? दस्तावेज कहां –

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि हाइवा किसी सत्तापक्ष से जुड़े कथित नेता का है। हालांकि, वाहन के वास्तविक स्वामी की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए जरूरी है कि वाहन के पंजीयन, मुरुम के स्रोत, परिवहन पास और भंडारण की अनुमति की जांच की जाए। यदि सब कुछ वैध है, तो स्थिति स्पष्ट करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। वहीं, यदि कोई अनियमितता मिलती है, तो संबंधित व्यक्ति के प्रभाव या पहचान से परे नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

अब सवालों से नहीं, कार्रवाई से जवाब दे प्रशासन!

खटखरिया तालाब के पास मुरुम डंपिंग का मामला केवल एक हाइवा तक सीमित नहीं है। यह खनिज विभाग और राजस्व अमले की निगरानी व्यवस्था की भी परीक्षा है। मुरुम वैध है या अवैध स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों के सत्यापन से ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
जनता के सवाल —
मुरुम कहां से लाई गई और क्या उसके परिवहन के वैध दस्तावेज हैं? क्या खटखरिया तालाब के पास भंडारण की अनुमति है? एसडीएम और तहसीलदार के वाहन निकलने के बावजूद मामले में निरीक्षण या कार्रवाई हुई या नहीं? खनिज अधिकारी के ‘कल देखते हैं’ के बाद जांच कब होगी? अब देखना यह है कि खनिज विभाग और राजस्व अमला मौके पर पहुंचकर नियमों के मुताबिक कार्रवाई करता है या खटखरिया तालाब के पास मुरुम डंपिंग का मामला सवालों के बीच ही अटका रहता है। लोगों की नजर अब अधिकारियों के जवाब और अगली कार्रवाई पर है।

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