कोयला भवन मुख्यालय में वित्तीय वर्ष 2026-27 की द्वितीय तिमाही की आंतरिक अंकेक्षण समीक्षा बैठक का आयोजन

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कोयला भवन मुख्यालय में आज वित्तीय वर्ष 2026-27 की द्वितीय तिमाही की आंतरिक अंकेक्षण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता निदेशक (वित्त/मानव संसाधन) श्री राजेश कुमार ने की। इस अवसर पर महाप्रबंधक (वित्त) श्री मनोज कांत झा एवं श्री अमन कुमार तथा विभागाध्यक्ष (आंतरिक अंकेक्षण) श्रीमती श्वेता सिंह सहित कोयला भवन मुख्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, मुख्यालय के लीड ऑडिटर, आंतरिक अंकेक्षण फर्मों के नामित साझेदार एवं टीम लीडर, क्षेत्रीय एएफएम तथा सभी क्षेत्रीय आंतरिक अंकेक्षक उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 की द्वितीय तिमाही (जुलाई-सितंबर 2026) की आंतरिक अंकेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की गई तथा उसका विस्तृत अवलोकन एवं समीक्षा की गई। इस क्रम में विभिन्न आंतरिक अंकेक्षण फर्मों ने पावरपॉइंट प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित अंकेक्षण निष्कर्षों, प्रमुख अवलोकनों, उपलब्धियों तथा सुझावों को साझा किया। प्रस्तुतियों के उपरांत संबंधित विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने अंकेक्षण निष्कर्षों, अनुपालन की वर्तमान स्थिति तथा अन्य महवपूर्ण विषयों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही, अंकेक्षण के दौरान सामने आए विषयों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा अनुपालन प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा की गई।

अपने संबोधन में निदेशक (वित्त/मानव संसाधन) श्री राजेश कुमार कहा कि आंतरिक अंकेक्षण का उद्देश्य केवल त्रुटियों की पहचान करना नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नियमसम्मत बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव देना भी है। उन्होंने कहा कि अंकेक्षण टिप्पणियों के अनुपालन की नियमित निगरानी, लंबित मामलों का समय पर निस्तारण तथा सुधारात्मक उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन संगठन की वित्तीय अनुशासन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है। उन्होंने संबंधित विभागों और अंकेक्षण टीमों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने, निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने तथा कार्यप्रणाली में निरंतर सुधार की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ की गई। स्वागत संबोधन में विभागाध्यक्ष (आंतरिक अंकेक्षण) श्रीमती श्वेता सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के समीक्षा सत्र अंकेक्षण संबंधी महत्वपूर्ण विषयों के मूल्यांकन, प्रमुख निष्कर्षों पर विचार-विमर्श तथा आवश्यक सुधारात्मक उपायों की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच हैं। उन्होंने आंतरिक अंकेक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने, समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने तथा अंकेक्षण टिप्पणियों के प्रभावी अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया।

बैठक के समापन सत्र में सभी अंकेक्षकों को अंकेक्षण कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने तथा समीक्षा बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। साथ ही, संबंधित विभागों एवं अंकेक्षण टीमों के बीच निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि अंकेक्षण निष्कर्षों पर प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक का समापन प्रबंधक (वित्त) श्री रोशन लाल नाड द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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