गौमाता का चारा भी नहीं बख्शा! हवा में बना चारागाह, पंचायत सचिव की तानाशाही, PCO की झूठी रिपोर्ट और जनपद CEO रवि ग्वाल की रहस्यमयी चुप्पी

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गौमाता का चारा भी नहीं बख्शा! हवा में बना चारागाह, पंचायत सचिव की तानाशाही, PCO की झूठी रिपोर्ट और जनपद CEO रवि ग्वाल की रहस्यमयी चुप्पी

जमुना कोतमा

सरकार गौ-रक्षा और पंचायती राज को मजबूत बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन मध्य प्रदेश के एक जनपद पंचायत में सिस्टम की सड़ांध खुलकर सामने आ गई है। बेजुबान गौमाता का मुंह का निवाला छीनकर अफसरों ने 4.32 लाख रुपये हड़प लिए, वहीं पंचायत सचिव ने नियम-कानूनों को ताक पर रखकर मनमानी शुरू कर दी। दोनों घोटालों में जनपद पंचायत सीईओ श्री रवि ग्वाल की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध नजर आ रही है। एक तरफ फर्जी चारागाह का घोटाला, दूसरी तरफ पंचायत सचिव की तानाशाही — दोनों मामलों में CEO महोदय की चुप्पी और लीपापोती ने जनता को भड़का दिया है।

पहला घोटाला: हवा में खड़ा चारागाह, 4.32 लाख रुपये डकार लिए गए

कार्य का नाम: गौशाला चारागाह सिद्धबाबा प्यारी क्र 1
वर्क कोड: 1746002039/LD/22012034526485
लूटी गई राशि: 4,32,180 रुपये
सरकार की योजना थी कि गौशालाओं के आसपास गायों को पर्याप्त चारा मिल सके, ताकि बेजुबान गौमाता को भूखा न रहना पड़े। लेकिन जमीनी हकीकत एकदम उलट है। मौके पर चारागाह का नामोनिशान तक नहीं — एक तिनका भी नहीं उगा, घास का एक गुच्छा भी नहीं दिखता। फिर भी अफसरों की मिलीभगत से पूरा काम दिखाकर 4.32 लाख रुपये सरकारी खजाने से निकाल लिए गए। सबसे शर्मनाक बात — बिना कोई काम किए कम्पलीशन सर्टिफिकेट (पूर्णता प्रमाण पत्र) भी जारी कर दिया गया।
यह सिर्फ पैसों की लूट नहीं, गौमाता के साथ सीधा विश्वासघात है

दूसरा घोटाला: पंचायत सचिव की खुली तानाशाही

इसी जनपद पंचायत में पंचायत सचिव श्री नीक राम केवट पर गंभीर आरोप लगे हैं। मध्य प्रदेश ग्राम पंचायत नियम 1994 के तहत अनिवार्य स्थायी समितियों की बैठकें बिल्कुल नहीं हो रही हैं। चुने हुए पंचों के अधिकारों को पूरी तरह दरकिनार कर सचिव साहब ने ग्राम पंचायत को अपनी मनमानी का अड्डा बना लिया है।
बिना किसी भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) के सीधे ‘पंचायत दर्पण पोर्टल’ पर मनमाने बिल पास किए जा रहे हैं। बैक-डेट में जाली हस्ताक्षर और फर्जी प्रस्ताव तैयार करने की भी मजबूत आशंका जताई जा रही है। नियमों की कब्रगाह बन चुकी इस पंचायत में सचिव ने सरकारी खजाने को चूना लगाने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें, लेकिन सिस्टम ने ढोंग रचा
जब जागरूक नागरिकों ने इन दोनों घोटालों की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज कराई, तो सिस्टम का असली चेहरा सामने आ गया:

पहली शिकायत (क्र. 36846721) — चारागाह घोटाले की
दूसरी शिकायत (क्र. 37380134) — पंचायत सचिव की मनमानी की

PCO यूजीन टोप्पो को दूसरी शिकायत की जांच सौंपी गई। लेकिन उन्होंने मौके पर जाने की बजाय एसी कमरे में बैठकर ही एक भ्रामक और पूरी तरह झूठी रिपोर्ट तैयार कर दी। रिपोर्ट में लिखा गया:
“शिकायतकर्ता ने कोई शिकायत नहीं की है। किसी अन्य व्यक्ति ने गलत नंबर का इस्तेमाल कर शिकायत की और वह नंबर बंद है, इसलिए शिकायत बंद की जाए।”
हकीकत: शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर आज भी पूरी तरह सक्रिय और चालू है। PCO ने शिकायतकर्ता से संपर्क करने, बयान लेने या सबूत मांगने की जहमत तक नहीं उठाई।

जनपद CEO रवि ग्वाल की रहस्यमयी चुप्पी — सवालों के घेरे में
दोनों मामलों में सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत सीईओ श्री रवि ग्वाल पर है

पहली शिकायत दर्ज हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन CEO ने शिकायतकर्ता से एक बार भी संपर्क नहीं किया, न बयान लिया, न सबूत मांगे। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि सीईओ जांच के नाम पर सिर्फ ढोंग रच रहे हैं और दोषी अधिकारियों की लीपापोती में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
दूसरी शिकायत में PCO की मनगढ़ंत रिपोर्ट को बिना किसी जांच-पड़ताल के CEO ने आंख मूंदकर आगे बढ़ा दिया। क्या उनके पास चंद सेकंड का भी समय नहीं था कि उस ‘बंद बताए गए’ नंबर पर एक कॉल करके सच्चाई जान लेते?
स्थानीय लोगों में चर्चा है कि CEO रवि ग्वाल की यह चुप्पी कोई साधारण प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि पंचायत सचिव नीक राम केवट और PCO यूजीन टोप्पो को बचाने की सोची-समझी साजिश है!

जनता अब पूछ रही है…

क्या आला अधिकारियों को जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से लाखों की सैलरी सिर्फ भ्रष्टाचारियों को ‘साम-दाम-दंड-भेद’ से बचाने के लिए दी जाती है?

क्या ये अधिकारी जनता के सेवक हैं या लूट तंत्र के मैनेजर?

गौमाता का पैसा और आम आदमी की मेहनत की कमाई कब तक इन सफेदपोश लुटेरों की ऐशो-आराम की भेंट चढ़ती रहेगी?

अब गेंद जिला कलेक्टर और लोकायुक्त के पाले में है। जनता देखना चाहती है कि क्या वे इस लूट के सिस्टम को तोड़ते हुए दोषी अधिकारियों पर एफआईआर, निलंबन और सख्त कार्रवाई करेंगे? या फिर यह सिलसिला जारी रहेगा?
अगर अब भी कोई ठोस एक्शन नहीं हुआ, तो साफ हो जाएगा कि इस हमाम में सब नंगे हैं।
जनता अब इंतजार कर रही है — न्याय मिलेगा या भ्रष्टाचार की यह सेंधमारी और गहरी होती जायागी

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