बढ़े बस किराए से छात्रों पर आर्थिक बोझ, विधायक मनीषा सिंह से लगाई राहत की गुहार
जयसिंहनगर से शहडोल तक 170 रुपये एक तरफ का किराया, रोजाना 340 रुपये खर्च करने को मजबूर विद्यार्थी
छात्रों ने रियायती बस किराया और प्रभावी बस पास व्यवस्था की मांग की, विधायक ने परिवहन अधिकारी को पत्र लिखकर डिस्काउंट की बात कही
कोयलांचल समाचार के लिए ब्यूरो रिपोर्ट
अरुण कुमार द्विवेदी, शहडोल से
शहडोल। महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए बढ़ता बस किराया अब गंभीर आर्थिक परेशानी का कारण बनता जा रहा है। दूर-दराज के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से प्रतिदिन बसों के माध्यम से शहडोल पहुंचकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने बढ़े हुए किराए को लेकर चिंता जताई है। इसी समस्या को लेकर छात्र-छात्राओं ने जयसिंहनगर विधायक मनीषा सिंह को मांग पत्र सौंपकर विद्यार्थियों के लिए रियायती बस किराया लागू करने तथा प्रभावी विद्यार्थी बस पास व्यवस्था शुरू कराने की मांग की है
छात्रों का कहना है कि शहडोल जिले के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आसपास के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से अध्ययन करने आते हैं। इनमें कई विद्यार्थी ऐसे परिवारों से हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति सीमित है। ऐसे में लगातार बढ़ता परिवहन खर्च उनके परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है। विद्यार्थियों के अनुसार बस किराए में हुई वृद्धि का सीधा असर उनकी नियमित पढ़ाई और उच्च शिक्षा जारी रखने की क्षमता पर पड़ रहा है।
जयसिंहनगर से शहडोल तक 170 रुपये एक तरफ किराया
विद्यार्थियों ने मांग पत्र में विशेष रूप से जयसिंहनगर क्षेत्र से शहडोल तक के बस किराए का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान में एक तरफ का किराया करीब 170 रुपये है। इस हिसाब से विद्यार्थी को प्रतिदिन आने-जाने में लगभग 340 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। महीने में नियमित रूप से कॉलेज आने वाले विद्यार्थियों के लिए यह राशि काफी अधिक हो जाती है।
छात्रों का कहना है कि पढ़ाई के साथ-साथ प्रतिदिन इतना अधिक परिवहन खर्च वहन करना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए कठिन होता जा रहा है। यदि किराए में राहत नहीं मिलती है तो कई विद्यार्थियों को नियमित रूप से कॉलेज आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
छात्रों ने रखीं चार प्रमुख मांगें
मांग पत्र के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से विद्यार्थियों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की है। इनमें महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए पूर्व निर्धारित बस किराया पुनः लागू करना तथा वर्तमान बढ़े हुए किराए को वापस लेना प्रमुख मांग है।
इसके अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए रियायती विद्यार्थी बस पास की प्रभावी व्यवस्था लागू करने, परिवहन विभाग एवं बस संचालकों के साथ समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों के लिए उचित एवं वहनीय किराया निर्धारित करने तथा ऐसी परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है, जिससे अधिक बस किराए के कारण विद्यार्थियों की नियमित शिक्षा प्रभावित न हो।
विधायक ने परिवहन अधिकारी को लिखा पत्र
छात्र-छात्राओं द्वारा सौंपे गए मांग पत्र पर विधायक मनीषा सिंह ने भी पहल करते हुए मुख्य जिला परिवहन अधिकारी को पत्र लिखा है। विधायक ने विद्यार्थियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए उनके बस किराए में डिस्काउंट देने की बात कही है। साथ ही छात्रों की मांगों को प्रशासनिक एवं शासन स्तर पर रखने का आश्वासन भी दिया गया है।
विधायक की ओर से परिवहन विभाग को पत्र लिखे जाने के बाद विद्यार्थियों में अपनी मांगों के समाधान को लेकर उम्मीद जगी है। अब देखना यह होगा कि परिवहन विभाग और प्रशासन विद्यार्थियों की परेशानी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और किराए में राहत देने के लिए कितनी शीघ्र कार्रवाई की जाती है।
मांग पूरी होगी या प्रशासनिक लेटलतीफी का शिकार?
29 अगस्त 2026 को सौंपे गए मांग पत्र पर महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हस्ताक्षर कर अपनी मांगों का समर्थन किया है। विद्यार्थियों का कहना है कि यह मांग किसी एक विद्यार्थी की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों छात्र-छात्राओं की समस्या है जो प्रतिदिन बसों से शहडोल आकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।
अब विद्यार्थियों की निगाहें प्रशासन और परिवहन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। विधायक द्वारा परिवहन अधिकारी को पत्र लिखे जाने के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विद्यार्थियों को वास्तविक किराया राहत कब तक मिलती है। यदि मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो बढ़ा हुआ बस किराया विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा के रास्ते में आर्थिक बाधा बन सकता है।
































































