बावीसा ब्राह्मण समाज में वैदिक परंपरा के साथ श्रावणी उपक्रम संपन्न

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बावीसा ब्राह्मण समाज में वैदिक परंपरा के साथ श्रावणी उपक्रम संपन्न

सैकड़ों समाजजनों ने नवीन यज्ञोपवीत धारण कर लिया धर्म एवं वेद मार्ग पर चलने का संकल्प

कोयलांचल समाचार के लिए ब्यूरो रिपोर्ट शैलेंद्र जोशी, धार

धार। स्थानीय बावीसा ब्राह्मण समाज द्वारा प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी वैदिक रीति-रिवाज एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ श्रावणी उपक्रम एवं यज्ञोपवीत संस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाज भवन में आयोजित धार्मिक आयोजन में बच्चों से लेकर वृद्धों तक समाज के सैकड़ों सदस्यों ने सहभागिता करते हुए नवीन यज्ञोपवीत धारण किया।

वैदिक परंपरा में श्रावण माह को अत्यंत पवित्र और शुद्ध माना गया है। मान्यता है कि वैदिक काल में इसी अवसर से गुरुकुलों में विद्यार्थी अपने विद्या संस्कार की शुरुआत करते थे। श्रावणी उपक्रम केवल धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, प्रायश्चित, ऋषि स्मरण और धर्म के प्रति नई प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जाता है।

कार्यक्रम के दौरान समाजजनों ने विधि-विधान से ऋषि तर्पण एवं ऋषि पूजन किया। इस अवसर पर उन महान ऋषियों का स्मरण एवं वंदन किया गया, जिन्होंने वेदों एवं मंत्रों की रचना कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित एवं सुरक्षित रखने का कार्य किया।

समाज अध्यक्ष डॉ. अभिषेक वैद ने श्रावणी उपक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्षभर वैदिक परंपराओं, पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठानों में जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए प्रायश्चित करने की यह महत्वपूर्ण परंपरा है। उन्होंने कहा कि नवीन यज्ञोपवीत धारण करना केवल धागा बदलना नहीं, बल्कि नई प्रतिज्ञा और नए संकल्प का प्रतीक है। इसके माध्यम से व्यक्ति वेद, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है।

कार्यक्रम में समाज के बच्चों, किशोरों, युवाओं एवं वरिष्ठजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। धार्मिक विधि पूर्ण होने के पश्चात सभी ने अपने पुराने यज्ञोपवीत का त्याग कर नवीन यज्ञोपवीत धारण किया और वैदिक परंपराओं के पालन का संकल्प लिया।

इस अवसर पर समाजजनों ने कहा कि भारतीय संस्कृति की यही प्राचीन धार्मिक एवं वैदिक परंपराएं देश की विशिष्ट पहचान हैं। बदलते समय के बावजूद इन परंपराओं को जीवित रखना नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कार और धार्मिक विरासत से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। श्रावणी उपक्रम के आयोजन से समाज में धार्मिक चेतना के साथ आपसी एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी संदेश दिया गया।

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