बड़ा खुलासा: पयारी में ‘कागजी तालाब’ पर बंटा 50 हजार का ‘मलाईदार’ भुगतान; बार-बार शिकायत के बाद भी मौन बैठे जिला और जनपद CEO की नीयत पर उठे गंभीर सवाल!

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बड़ा खुलासा: पयारी में ‘कागजी तालाब’ पर बंटा 50 हजार का ‘मलाईदार’ भुगतान; बार-बार शिकायत के बाद भी मौन बैठे जिला और जनपद CEO की नीयत पर उठे गंभीर सवाल!

मित्तल महरा की रिपोर्ट

जमुना कोतमा
ग्रामीणों को रोजगार की गारंटी देने और गांवों के विकास के नाम पर आने वाले सरकारी फंड को अफसरशाही और बिचौलियों ने मिलकर लूट का खुला चारागाह बना दिया है। किन्योकी गौशाला चारा गाह। भ्रष्टाचार में अभी तक कोई कार्रवाई नहींकी गई जनपद पंचायत के तहत आने वाली ग्राम पंचायत पायरी में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तानाशाही का ऐसा घिनौना खेल उजागर हुआ है, जिसने पूरी व्यवस्था को बेनकाब कर दिया है

यहाँ एक तरफ बिना एक तगाड़ी मिट्टी उठाए ‘कागजी तालाब’ के नाम पर ₹50,000 का अग्रिम भुगतान डकार लिया गया, तो दूसरी तरफ चिलचिलाती धूप में पसीना बहाने वाले असली मजदूरों के पेट पर लात मारकर उन्हें सिर्फ 100 से 124 रुपये की भीख नुमा दिहाड़ी थमा दी गई। इस खुली लूट की कई बार खबर के माध्यम से जानकारी दे चुकी हैं, लेकिन जिला और जनपद CEO की ‘शून्य कार्रवाई’ ने अब सीधे उनकी प्रशासनिक नीयत और ईमानदारी पर ही सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
मनरेगा के इस महाघोटाले के दो पहलू: एक तरफ ‘भूतहा’ तालाब, दूसरी तरफ मजदूरों का बेरहम शोषण
सरकारी फाइलों में तो विकास की गंगा बह रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में सिर्फ भ्रष्टाचार का कीचड़ है। पायरी पंचायत में चल रहे दो अलग-अलग कार्यों की यह कहानी अधिकारियों के कथित ‘मूक संरक्षण’ को उजागर करने के लिए काफी है:

खेल नंबर 1: ‘मिस्टर इंडिया’ तालाब, जो कागजों में लबालब, जमीन पर गायब!
हितग्राही का नाम: संतोष कुमार
वर्क कोड: 1746002039/IF/22012035163882
स्वीकृत राशि: ₹3,22,000
भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा: इस कार्य के लिए तीन-तीन फर्जी मस्टर रोल जारी करके लगभग ₹50,000 का भुगतान भी मजे से निकाल लिया गया।
जमीनी हकीकत: मौके पर जाकर देखें तो दूर-दूर तक न तो कोई खुदाई का निशान है और न ही कोई तालाब! बिना एक भी मजदूर के काम किए, यहाँ कागजी तौर पर हाजिरी भरकर मजदूरों का मूल्यांकन 175 से 180 रुपये तक कर दिया गया और सरकारी खजाने में सरेआम डकैती डाल दी गई।

खेल नंबर 2: पसीना बहाया इंसानों ने, मलाई खाई मशीनों ने!
हितग्राही का नाम: वेदवती महरा पति दादी महरा
वर्क कोड: 1746002039/IF/22012035271662
मजदूरों से क्रूर मजाक: यहाँ गरीब मजदूरों ने सच में हाड़-तोड़ मेहनत की। NMMS एप से रोज सुबह हाजिरी लगी, फेस स्कैन हुआ, लेकिन जब पैसे देने की बारी आई तो उनके खातों में महज 100 से 124 रुपये डालकर उनके अधिकारों की धज्जियां उड़ा दी गईं।
नियमों को ठेंगा: हद तो तब हो गई जब शुरुआती काम के बाद गरीब मजदूरों को काम से भगाकर रात के अंधेरे में जेसीबी (JCB) मशीन से तालाब खुदवाया गया, जो मनरेगा के कायदों के बिल्कुल खिलाफ है। रही-सही कसर तब पूरी हो गई जब तालाब की निकाली गई मिट्टी को सार्वजनिक रास्ते पर फेंक दिया गया, जिससे आने वाले मानसून में पूरा रास्ता कीचड़ में तब्दील होना तय है।
रास्ते खराब करने का अधिकार ग्राम पंचायत को या जनपद पंचायत को कौन दिया या जिला लेवल से आदेश आता है रास्ता खराब कर दो मानसून में फिर बना देना पैसा निकल लेना

साहब! एसी की ठंडी हवा से बाहर निकलिए… बार-बार शिकायत के बाद भी ‘शून्य कार्रवाई’ क्यों?
जिला और जनपद CEO से सीधे सवाल: क्या आपकी अंतरात्मा मर चुकी है?
सवाल नंबर 1: ग्राम पंचायत पायरी में हो रहे इस आर्थिक कदाचार की शिकायतें जब कई बार आपके टेबल तक पहुँच चुकी हैं, तो फिर अब तक कार्रवाई का आंकड़ा ‘शून्य’ क्यों है? इस चुप्पी को भ्रष्टाचार में आपकी ‘मूक सहमति’ क्यों न माना जाए?
अगर कारवाही की गई प्यारी क्रमांक 1 में सभी दस्तावेज़ जारी करे
किया और कैसा कारवाही की गई है

सवाल नंबर 2: जब गायब तालाब के नाम पर ₹50,000 का फर्जी भुगतान हो रहा था, तब जनपद CEO साहब की ‘जांच टीम’ और तकनीकी मूल्यांकन करने वाले सब-इंजीनियर (उपयंत्री) किस गहरी नींद में सो रहे थे? बिना मौके पर गए ‘गायब तालाब’ की मापन पुस्तिका (MB) कैसे भर दी गई?

सवाल नंबर 3: एक तरफ गरीब मजदूर अपनी जायज मजदूरी के लिए भटक रहे हैं और खुलेआम मशीनों से काम हो रहा है, लेकिन जिला पंचायत CEO की ‘विजिलेंस टीम’ को इसकी भनक तक नहीं है। क्या अधिकारियों की इस घोर उदासीनता का मतलब यह है कि भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ पंचायत भवन तक नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय के आलीशान कमरों तक फैली हुई हैं?
गरीबों के हक की कमाई पर डाका डालने वाले इन भ्रष्ट सचिव, सरपंच और रोजगार सहायक और सब इंजीनियर। को आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है, जो कई शिकायतों के बाद भी प्रशासन उन पर हाथ डालने से कतरा रहा है?

फर्जी तरीके से संतोष कुमार के खेत तालाब निकाले गए सभी मस्टर रोल (Muster Roll) की बारीक जांच हो। और पता किसलिए पेमेंट किया गया था
सभी लोग कहा काम किए थे तो उन्हें। मज़दूरी मिली है

तकनीकी मूल्यांकन करने वाले उपयंत्री (Sub-Engineer) की मापन पुस्तिका (MB) और भुगतान आदेशों की स्क्रूटनी की जाए।
कड़ी से कड़ी कारवाही की जाए

नियमों के विरुद्ध जेसीबी मशीन चलाने और सार्वजनिक रास्ता खराब करने वाले दोषियों से सरकारी धन की वसूली की जाए।
हमारा सीधा संदेश: देखना यह है कि इस गंभीर और साक्ष्य-सहित खुलासे के बाद भी जिला पंचायत सीईओ और जनपद सीईओ अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर भ्रष्टाचारियों पर कानूनी गाज गिराते हैं या अपनी ‘शून्य कार्रवाई’ के पुराने रिकॉर्ड को बरकरार रखकर यह साबित करते हैं कि उन्हें गरीबों के पसीने और आंसुओं से कोई सरोकार नहीं है!

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