अमरकंटक में तीन अक्तूबर को द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी का होगा आगमन
चार दिवसीय प्रवास के दौरान नर्मदा पूजन , रुद्राभिषेक , ललिता सहस्त्रनाम एवं संत समागम सहित होंगे अनेक धार्मिक आयोजन
संवाददाता / श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी , तपोभूमि अमरकंटक में आगामी 3 से 6 अक्टूबर तक एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनेगी ।
पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य 1008 परमपूज्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती जी महाराज चार दिवसीय प्रवास पर अमरकंटक पधार रहे हैं । उनके आगमन को लेकर शंकराचार्य आश्रम , संत समाज एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण व्याप्त है ।
शंकराचार्य आश्रम के व्यवस्थापक ब्रह्मचारी स्वामी श्री नर्मदानंद जी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज पहली बार शंकराचार्य पद पर प्रतिष्ठित होने के पश्चात अपने गुरुस्थान परमहंसी झोतेश्वर (गोटेगांव) से अमरकंटक बाय रोड पधार रहे हैं ।
इस अवसर पर आश्रम परिवार द्वारा उनका भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया जाएगा । प्रवास के दौरान पादुका पूजन , ललिता सहस्त्रनाम पाठ , रुद्राभिषेक , नर्मदा पूजन सहित विभिन्न वैदिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा
अपने प्रवास के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य जी मां नर्मदा के पवित्र उद्गम स्थल पहुंचकर दर्शन-पूजन करेंगे तथा क्षेत्र के प्रमुख संत-महात्माओं से भेंट कर आध्यात्मिक विमर्श करेंगे । साथ ही श्रद्धालुओं को सत्संग , प्रवचन एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे । उनके आशीर्वचन सुनने एवं दर्शन प्राप्त करने के लिए अमरकंटक सहित मध्यप्रदेश , छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है
धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे
इस प्रवास से अमरकंटक में आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक गतिविधियों का विशेष वातावरण निर्मित होगा । संतों की तपोभूमि और मां नर्मदा की उद्गम स्थली पर जगद्गुरु शंकराचार्य की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए एक दुर्लभ अवसर मानी जा रही है
शंकराचार्य आश्रम द्वारा प्रवास को लेकर व्यापक तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं । संत समाज , धर्मप्रेमी नागरिक एवं श्रद्धालु आयोजन को सफल बनाने के लिए सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं । चार दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक प्रवास के दौरान अमरकंटक में धर्म , संस्कृति और सनातन परंपरा की अनुपम छटा देखने को मिलेगी


































































