- अधिवक्ता अविनाश कुमार पाठक के साथ मारपीट की सूचना मिलते ही सक्रिय हुए जयकांत मिश्रा, उपचार के समय से ही निभाया साथ; रात से शुरू की न्याय की लड़ाई
- बुढ़ार एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जयकांत मिश्रा ने अस्पताल में उपचार से लेकर एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस कार्रवाई की मांग तक निभाई सक्रिय भूमिका, अधिवक्ता संघ के सभी पदाधिकारी एवं साथी अधिवक्ता पीड़ित के साथ मजबूती से खड़े रहे।
बुढ़ार/शहडोल। बुढ़ार बस स्टैंड पर 30 अक्टूबर 2026 की रात लगभग 12 से 12:30 बजे अधिवक्ता अविनाश कुमार पाठक के साथ हुई कथित मारपीट की घटना ने अधिवक्ता समाज में आक्रोश पैदा कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही बुढ़ार एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जयकांत मिश्रा तत्काल सक्रिय हो गए। उन्होंने अपने साथी अधिवक्ता को न्याय दिलाने के लिए न केवल रात से ही प्रयास शुरू किए, बल्कि उपचार के समय से लेकर पुलिस कार्रवाई तक लगातार उनके साथ खड़े रहे।
- सूचना मिलते ही रात 1:25 बजे अस्पताल पहुँचे अध्यक्ष, उपचार के दौरान भी नहीं छोड़ा साथ
घटना की सूचना मिलते ही अध्यक्ष जयकांत मिश्रा लगभग रात 1:25 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बुढ़ार पहुँचे, जहाँ घायल अधिवक्ता अविनाश कुमार पाठक का उपचार चल रहा था। अध्यक्ष उपचार के समय से ही उनके साथ मौजूद रहे और चिकित्सकीय व्यवस्था से लेकर आवश्यक जाँच तक हर स्तर पर सहयोग करते रहे। चिकित्सक द्वारा मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने के साथ सीटी स्कैन कराने की सलाह भी दी गई। हालांकि, शहडोल में सीटी स्कैन मशीन खराब होने के कारण तत्काल जाँच नहीं हो सकी। इसके बावजूद अध्यक्ष ने घायल साथी के उपचार एवं चिकित्सकीय जाँच को लेकर लगातार प्रयास जारी रखे।
जयकांत मिश्रा ने इस पूरे घटनाक्रम में यह स्पष्ट किया कि किसी साथी अधिवक्ता के साथ संकट की घड़ी में संगठन उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। वे उपचार के समय से ही पीड़ित अधिवक्ता के साथ रहे और रातभर मामले में आवश्यक कार्रवाई के लिए सक्रिय रहे।
- रात से अगले दिन तक जारी रही न्याय की लड़ाई
जयकांत मिश्रा ने 30 अक्टूबर की रात से लेकर 31 अक्टूबर 2026 तक लगातार मामले में कार्रवाई के लिए प्रयास किए। अगले दिन वे अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों एवं साथी अधिवक्ताओं के साथ बुढ़ार थाने पहुँचे और आरक्षक रोहित यादव, क्रमांक 703 के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की पहल की।
अधिवक्ता संघ की ओर से संबंधित आरक्षक को तत्काल थाने से हटाने, निलंबित करने तथा उसके विरुद्ध विभागीय जाँच कराने की माँग भी की गई। अधिवक्ताओं की इस पहल के बाद संबंधित आरक्षक को पुलिस लाइन शहडोल भेजकर लाइन हाजिर किया गया।

- घटना को बताया बर्बरतापूर्ण, आगे भी कार्रवाई करेगा अधिवक्ता संघ
अध्यक्ष जयकांत मिश्रा ने घटना को अत्यंत बर्बरतापूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी अधिवक्ता साथी के साथ भविष्य में इस प्रकार की घटना दोबारा न हो, इसके लिए अधिवक्ता संघ बुढ़ार आगे भी आवश्यक कदम उठाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित अधिवक्ता को न्याय दिलाने के लिए संघ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और आगे जो भी उचित कानूनी एवं संगठनात्मक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
- अधिवक्ता समाज की एकजुटता आई सामने
इस पूरे घटनाक्रम में अधिवक्ता संघ बुढ़ार के सभी पदाधिकारी एवं साथी अधिवक्ता एकजुट होकर पीड़ित अधिवक्ता अविनाश कुमार पाठक के साथ खड़े रहे। अस्पताल में उपचार के समय से लेकर चिकित्सकीय जाँच, थाने में एफआईआर दर्ज कराने और पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की माँग तक सभी ने अपना सहयोग दिया।
विशेष रूप से अध्यक्ष जयकांत मिश्रा की सक्रियता और अपने साथी के प्रति जिम्मेदारी इस पूरे घटनाक्रम में सामने आई। उन्होंने यह साबित किया कि संगठन का नेतृत्व केवल पद तक सीमित नहीं होता, बल्कि संकट के समय अपने साथियों के साथ खड़े रहना ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है।
- एफआईआर और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई
उपलब्ध एफआईआर की प्रति के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराएँ 296(क), 115(2), 351(3) एवं 3(5) का उल्लेख किया गया है। वहीं, पुलिस अधीक्षक कार्यालय शहडोल के 31 अक्टूबर 2026 के आदेश के अनुसार आरक्षक रोहित यादव, क्रमांक 703 को बुढ़ार थाने से हटाकर पुलिस लाइन शहडोल भेजने की कार्रवाई की गई है।
अब मेडिकल रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों एवं पुलिस जाँच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया है कि पीड़ित साथी को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संगठन पूरी मजबूती के साथ प्रयास करता रहेगा।







































































