अमरकंटक के जर्जर हुडको आवासों में मंडरा रहा खतरा , कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

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अमरकंटक के जर्जर हुडको आवासों में मंडरा रहा खतरा , कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

नगर परिषद की संपत्ति पर बिना आवंटन रह रहे लोगों की सुरक्षा पर उठे सवाल , निरीक्षण और मरम्मत के अभाव में बढ़ी चिंता

संवाददाता – श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक – मां नर्मदा की उद्गम स्थली/पवित्र नगरी अमरकंटक के नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक-2 बराती स्थित हुडको आवास इन दिनों अपनी बदहाली और जर्जर स्थिति के कारण गंभीर चिंता का विषय बना हुआ हैं । वर्ष 1988-89 में तत्कालीन विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) द्वारा निर्मित इन आवासों की हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि इनमें रह रहे लोगों की जान हर समय जोखिम में बनी हुई है । स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन भवनों का निरीक्षण और आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है ।
जानकारी के अनुसार वर्तमान में ये आवास नगर परिषद अमरकंटक की संपत्ति हैं , लेकिन वर्षों से इनके रखरखाव , मरम्मत और तकनीकी परीक्षण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है । भवनों की दीवारों में दरारें , उखड़ता प्लास्टर , कमजोर छतें और जर्जर ढांचा उनकी खस्ताहाल स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं । इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और अधिकारी इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं ।
बिना वैध आवंटन के रह रहे लोगों की स्थिति भी चिंताजनक है ।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कुछ मजदूर एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इन आवासों में बिना किसी विधिवत आवंटन के रह रहे हैं । ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि नगर परिषद की संपत्ति पर लोगों को रहने की अनुमति किस आधार पर मिली है और संबंधित विभाग द्वारा अब तक इसकी जांच क्यों नहीं की गई ।
एक ओर भवनों की स्थिति लगातार खतरनाक होती जा रही है , वहीं दूसरी ओर इनमें रहने वाले लोग भी संसाधनों के अभाव में आवश्यक मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं । परिणामस्वरूप दुर्घटना की आशंका दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है । हादसा की स्थिति होने पर इसका जिम्मेदार कौन होगा ?
नगर परिषद प्रशासन अथवा संबंधित विभागों द्वारा अब तक किसी प्रकार का सुरक्षा मूल्यांकन नहीं कराया गया है । ऐसे में किसी संभावित हादसे की स्थिति में जवाबदेही तय करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है

जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि प्रशासन को किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए । भवनों का तकनीकी परीक्षण कर उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन कराया जाए तथा जो आवास रहने योग्य नहीं हैं उन्हें नियमानुसार अति जर्जर एवं असुरक्षित घोषित कर आवश्यक कदम उठाए जाएं ।

तत्काल कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन से मांग की है कि वार्ड क्रमांक-2 बराती स्थित हुडको आवासों का शीघ्र तकनीकी एवं भौतिक निरीक्षण कराया जाए । बिना आवंटन रह रहे लोगों की वैधानिक स्थिति की जांच की जाए तथा नियमानुसार आवश्यकता पड़ने पर उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए । वहीं जिन भवनों की मरम्मत संभव है , उन्हें विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर दुरुस्त कराया जाए ताकि किसी भी निर्दोष परिवार , व्यक्ति की जान खतरे में न पड़े

जनहित से जुड़े इस गंभीर मामले में प्रशासन की त्वरित पहल ही संभावित दुर्घटनाओं को रोक सकती है । समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है ।

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