सेवा और समर्पण की मिसाल बने राम दुबे, 8 वर्षों में 28 हजार से अधिक गौवंश को दिया नया जीवन

अनूपपुर। सड़क किनारे दर्द से तड़प रही एक घायल गौ माता… लोग आते-जाते रहे, किसी ने वीडियो बनाया तो किसी ने अफसोस जताया, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं बढ़ा। ऐसे समय में एक फोन कॉल ने उम्मीद की नई किरण जगाई। सूचना मिलते ही श्री अटल कामधेनु गौ सेवा संस्थान, धनपुरी के संस्थापक राम दुबे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घायल गौ माता का सुरक्षित रेस्क्यू कर उपचार के लिए संस्थान ले आए।
यह घटना बुधवार की है। जिला मुख्यालय से जैतहरी की ओर जाने वाले मार्ग पर वाल्मीक पेट्रोल पंप के पास सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई गौ माता कई घंटों तक सड़क किनारे पड़ी रही। जागरूक नागरिक शुभम साहू ने इसकी सूचना संस्थान को दी। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और घायल गौ माता को सुरक्षित संस्थान लाकर उसका इलाज शुरू किया गया। लगातार कई दिनों तक दवाइयों, पौष्टिक आहार और समर्पित देखभाल के बाद अब गौ माता के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार है और वह धीरे-धीरे स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रही है।
संघर्षों से शुरू हुई सेवा की प्रेरणादायक यात्रा
राम दुबे बताते हैं कि जब उन्होंने गौ सेवा का संकल्प लिया था, तब उनके पास न पर्याप्त संसाधन थे, न आर्थिक सहयोग और न ही किसी प्रकार की सरकारी सहायता। कई लोगों ने उन्हें यह कहकर हतोत्साहित किया कि यह सेवा अधिक दिनों तक नहीं चल पाएगी, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने कई बार अपनी निजी जरूरतों से पहले घायल गौवंश के इलाज, चारे और दवाइयों की व्यवस्था को प्राथमिकता दी। अनगिनत रातें रेस्क्यू अभियान में जागकर बिताईं। तेज बारिश, कड़ाके की ठंड और भीषण गर्मी—हर मौसम में सूचना मिलते ही वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर बेजुबान पशुओं की जान बचाने में जुट जाते हैं।
8 वर्षों में 28 हजार से अधिक गौवंश का रेस्क्यू
संस्थान के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में 28,000 से अधिक घायल, बीमार, बेसहारा एवं दुर्घटनाग्रस्त गौवंश का रेस्क्यू कर उनका उपचार, सेवा और संरक्षण किया जा चुका है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों बेजुबान जिंदगियों को नया जीवन देने की प्रेरणादायक मिसाल है।
आज श्री अटल कामधेनु गौ सेवा संस्थान, धनपुरी केवल एक गौशाला नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता का सशक्त केंद्र बन चुका है, जहां प्रत्येक घायल गौ माता का उपचार परिवार के सदस्य की तरह किया जाता है।
समाज से की संवेदनशील बनने की अपील
संस्थान के संस्थापक राम दुबे ने कहा,
गौ माता अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकतीं, इसलिए उनकी तकलीफ को समझना हमारा नैतिक कर्तव्य है। मेरा सपना है कि कोई भी घायल गौ माता सड़क पर तड़पते हुए दम न तोड़े। जब तक जीवन है, गौ सेवा का यह अभियान निरंतर चलता रहेगा
उन्होंने आमजन से अपील की कि यदि कहीं भी कोई घायल या बेसहारा गौवंश दिखाई दे, तो उसे अनदेखा न करें। समय पर दी गई एक छोटी-सी सूचना भी किसी बेजुबान की जान बचा सकती है
राम दुबे और उनकी टीम की यह निस्वार्थ सेवा समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो यह संदेश देती है कि संवेदनशीलता, समर्पण और सेवा की भावना से हजारों बेजुबान जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
































































