सीएमपीडीआई और एनटीपीसी माइनिंग ने मिलाया हाथ, ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक खनन को मिलेगी नई मजबूती
रणनीतिक एमओयू पर हस्ताक्षर, तकनीकी प्रशिक्षण, खनिज अन्वेषण, कोयला गैसीफिकेशन और पर्यावरण प्रबंधन में होगा सहयोग
रांची। भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने और आधुनिक खनन प्रणाली को नई दिशा देने के उद्देश्य से सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) तथा एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड (एनएमएल) के बीच मंगलवार को सीएमपीडीआई मुख्यालय, रांची में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत सीएमपीडीआई, एनएमएल को कोयला एवं अन्य खनिज परियोजनाओं के लिए तकनीकी परामर्श, वैज्ञानिक योजना और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराएगा।
हस्ताक्षर समारोह सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह, एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुब्रत कुमार दास तथा सीएमपीडीआई के कार्यकारी निदेशकों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। अधिकारियों ने इस समझौते को देश के खनन क्षेत्र और ऊर्जा क्षेत्र के लिए दूरगामी महत्व का कदम बताया।
समझौते के तहत सीएमपीडीआई एनएमएल को भूमिगत एवं खुली खदानों के संचालन, उन्नत खनन तकनीकों, तकनीकी प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण में सहयोग देगा। इसके साथ ही खनिज अन्वेषण, नियामकीय मानकों के पालन, ‘एक्रिडिटेड प्रोस्पेक्टिंग एजेंसी’ (एपीए) की मान्यता प्राप्त करने तथा ‘मिनरल प्रोस्पेक्टिंग परमिशन असेसमेंट’ (एमपीपीए) से जुड़े कार्यों में भी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
यह सहयोग केवल खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोयला गैसीफिकेशन, भू-वैज्ञानिक एवं भू-भौतिकीय सर्वेक्षण, जीआईएस आधारित अध्ययन, अवसंरचना इंजीनियरिंग तथा पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में भी दोनों संस्थान मिलकर कार्य करेंगे। इससे परियोजनाओं के वैज्ञानिक विकास के साथ पर्यावरणीय मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह ने कहा कि यह एमओयू सीएमपीडीआई की तकनीकी विशेषज्ञता को एनटीपीसी माइनिंग के रणनीतिक उद्देश्यों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, संस्थागत क्षमता निर्माण और टिकाऊ खनन प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा।
एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के सीईओ सुब्रत कुमार दास ने कहा कि सीएमपीडीआई की विशेषज्ञता का लाभ लेकर कंपनी खनिज अन्वेषण, माइन प्लानिंग, पर्यावरण इंजीनियरिंग और जिम्मेदार खनन गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ खनन क्षेत्र में नई तकनीकों के उपयोग को भी गति देगी।
विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीतिक समझौता भारत में तकनीक आधारित, टिकाऊ और दक्ष खनन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करते हुए देश के ऊर्जा एवं खनन क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास में अहम भूमिका निभाएगा।




































