अनूपपुर की राजनीति में युवा नेतृत्व की चर्चा तेज, आशुतोष तिवारी को लेकर छिड़ी बहस
‘बाहरी’ और ‘सरकारी कर्मचारी’ बताए जाने के दावों पर समर्थकों ने उठाए सवाल, राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल

अनूपपुर। जिले की राजनीति में इन दिनों युवा नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी से जुड़े युवा कार्यकर्ता आशुतोष तिवारी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर चल रही बहस ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कुछ माध्यमों में उन्हें “बाहरी” तथा “सरकारी कर्मचारी” बताकर सवाल खड़े किए गए हैं, जबकि उनके समर्थक इन आरोपों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बता रहे हैं।
स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी उभरते हुए युवा चेहरे के प्रति बढ़ती लोकप्रियता अक्सर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को जन्म देती है। ऐसे में आशुतोष तिवारी को लेकर सामने आए विवाद को भी कई लोग इसी नजरिए से देख रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि उनका जन्म, शिक्षा और सामाजिक जीवन अनूपपुर जिले से जुड़ा रहा है, इसलिए उन्हें बाहरी बताने के प्रयास तर्कसंगत प्रतीत नहीं होते।
जानकारी के अनुसार आशुतोष तिवारी की प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर अनूपपुर में हुई, जबकि उच्चतर माध्यमिक शिक्षा शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय अनूपपुर से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने शासकीय तुलसी महाविद्यालय से स्नातक एवं स्नातकोत्तर तथा संस्कार लॉ कॉलेज से विधि की शिक्षा हासिल की। परिवार भी लंबे समय से जिले में निवासरत है।
छात्र राजनीति के क्षेत्र में भी आशुतोष तिवारी की सक्रिय भूमिका रही है। वर्ष 2014 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए जिला संयोजक तक पहुंचे। संगठन में सक्रिय कार्य के चलते उन्हें कटनी जिला संगठन मंत्री और बाद में नरसिंहपुर विभाग संगठन मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिलीं। बताया जाता है कि उन्होंने कई वर्षों तक पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में संगठन विस्तार का कार्य किया।
वहीं, उन्हें सरकारी कर्मचारी बताए जाने के मुद्दे पर भी बहस जारी है। समर्थकों का कहना है कि वे एसईसीएल में जनरल असिस्टेंट के रूप में कार्यरत हैं और इस तथ्य को अलग ढंग से प्रस्तुत कर राजनीतिक विवाद खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिले में शिक्षित, सक्रिय और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले युवा चेहरों की बढ़ती भूमिका आने वाले समय में स्थानीय राजनीति की दिशा तय कर सकती है। ऐसे में आशुतोष तिवारी को लेकर जारी बहस को केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल जिले के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है कि यह विरोध वैचारिक है या फिर उभरते युवा नेतृत्व की बढ़ती स्वीकार्यता का परिणाम।




































