बेम्हौरी पंचायत में सोलर स्ट्रीट लाइट पर सवाल: घटिया काम और अनियमित भुगतान के आरोप, जांच की मांग तेज

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बेम्हौरी ग्राम पंचायत के सोलर स्ट्रीट लाइट में भ्रष्टाचार का मामला आया सामने

 

( सरपंच पति और सचिव की भूमिका संदिग्ध -ग्रामीण )

 

 

शहडोल।।

जनपद पंचायत सोहागपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बेम्हौरी और इसके राजस्व ग्राम गरफंदिया में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। करीब 8-9 माह से गांव के वार्ड क्रमांक 18 समेत कई वार्डों की सोलर लाइटें बंद पड़ी हैं। शिकायतों के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है। जांच में सामने आया है कि स्ट्रीट लाइट के काम में घटिया सामग्री का उपयोग कर मनमाने तरीके से भुगतान कर दिया गया है। ऐसा नहीं है कि यह भ्रष्टाचार सिर्फ बेम्हौरी ग्राम पंचायत में हुआ, बल्कि सोहागपुर जनपद के सभी ग्राम पंचायतों का हाल लगभग यही है। इस संबंध में कुछ ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन आदि में शिकायत भी की हुई है। लगाए गए सोलर स्ट्रीट लाइट की कीमत मात्र 7 हजार बताई जा रही है, लेकिन प्रति स्ट्रीट लाइट 24-25 हजार आहरित करी गई, बताई जा रही है।

 

 

फर्जी फर्मों को ऑफ रिकॉर्ड ठेका

 

जानकारी के अनुसार पंचायतों ने शासन के निर्देशों को दरकिनार कर, निविदा प्रक्रिया अपनाए बिना चहेती फर्मों को ऑफ रिकॉर्ड ठेका दिया। इसके बदले कथित तौर पर कमीशन की राशि पहले ही तय कर ली गई थी। बताया गया कि, किसी पूजा इलेक्ट्रिकल्स (वार्ड 12, पटेल नगर, शहडोल), आर्यन इंटरप्राइजेज (चितराव) जैसी फर्मों ने पंचायतों में डुप्लीकेट लाइटें सप्लाई कीं।

 

 

घटिया क्वालिटी, आधा-अधूरा काम

 

ग्रामीणों ने बताया कि जो लाइटें लगाई गईं, वे कुछ ही महीनों में खराब हो गईं। अधिकांश स्थानों पर काम अधूरा छोड़ दिया गया, लेकिन भुगतान पूरा निकाल लिया गया। पंचायतों के खाते से राशि पूरी आहरित की जा चुकी है।

बेम्हौरी वार्ड नंबर 18 के ग्रामीणों ने सोलर स्ट्रीट लाइट बंद होने की शिकायतें की तो सरपंच पति और सचिव तुलसीदास सिंह कुछ महीने टालमटोल किएं फिर ग्रामीणों से मुंह छिपाते घूम रहे हैं। ज्ञात हो कि पूरे सोहागपुर जनपद में यह खेल कई पंचायतों में चला है। यदि निष्पक्ष जांच हो, तो बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज हो सकती हैं।

 

बाजार मूल्य से ज्यादा पर खरीदी

 

स्ट्रीट लाइट लगाने में प्रयुक्त सामग्री की दरें बाजार मूल्य से कहीं अधिक दर्ज की गई हैं। इससे स्पष्ट होता है कि पंचायत में विकास के नाम पर शासकीय बजट का दुरुपयोग कर धन निकासी की गई है।

 

भण्डार क्रय नियमों की खुली अवहेलना

 

सरकार के भंडार क्रय नियमों के अनुसार किसी भी खरीद में वित्तीय औचित्य और पारदर्शिता आवश्यक होती है। लेकिन इस पूरे प्रकरण में इन नियमों की खुलेआम अवहेलना की गई है।

 

 

सोशल ऑडिट की मांग

 

स्थानीय नागरिकों और शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सोलर लाइट योजना की सोशल ऑडिट कराई जाए, जिससे सामग्री की खरीदी, भुगतान, और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच हो सके। साथ ही, शिकायतकर्ता की भौतिक सहमति के बिना किसी भी स्तर पर शिकायत को बंद न किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि मामला ग्राम विकास योजनाओं में बढ़ती अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की एक कड़ी है। यदि इस पर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो शासकीय योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच सकेगा।

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