शिवसेना के दबाव में जागा प्रबंधन

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29 मई तक हटेगा नारायण सिंह का अवैध निर्माण, कार्रवाई के आदेश जारी

जमुना-कोतमा, अनूपपुर।

जमुना कॉलरी क्षेत्र में लंबे समय से चर्चा का विषय बने अवैध निर्माण मामले में आखिरकार बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। शिवसेना द्वारा किए गए विरोध और ज्ञापन के बाद एसईसीएल प्रबंधन हरकत में आया तथा अवैध कब्जा हटाने के लिए ध्वस्तीकरण आदेश जारी कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में शिवसेना कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है, वहीं स्थानीय लोग भी इसे संगठन की बड़ी जीत मान रहे हैं।

 

जानकारी के अनुसार वार्ड क्रमांक 7 जमुना कॉलरी क्षेत्र में नारायण सिंह पिता स्वर्गीय गंगा सिंह द्वारा एसईसीएल की लोक परिसर भूमि पर कथित रूप से अवैध निर्माण किया गया था। यह मामला लंबे समय से क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। इसी बीच शिवसेना ने मामले को गंभीरता से उठाते हुए एसईसीएल संपदा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

 

मामले को निर्णायक मोड़ तब मिला जब पप्पू तिवारी ने स्वयं पूरे प्रकरण को संज्ञान में लिया। उनके निर्देश पर शिवसेना पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प्रबंधन पर दबाव बनाया और अवैध कब्जा हटाने की मांग को लेकर लगातार आवाज बुलंद की। संगठन का कहना था कि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि प्रशासन कार्रवाई नहीं करता तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

 

शिवसेना के दबाव का असर कुछ ही दिनों में दिखाई दिया। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) जमुना-कोतमा क्षेत्र के संपदा अधिकारी द्वारा 22 अप्रैल 2026 को ध्वस्तीकरण आदेश क्रमांक 10/2026 जारी किया गया। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित व्यक्ति 29 मई 2026 तक स्वयं अवैध निर्माण हटा ले, अन्यथा प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर निर्माण ध्वस्त किया जाएगा। यह कार्रवाई लोक परिसर अधिनियम 1971 की धारा 5(1) के तहत की जा रही है।

 

इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में पप्पू तिवारी, शिव चक्रवर्ती तथा राजेश महाराणा की सक्रियता की जमकर चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महीनों से लंबित इस मामले में किसी ने गंभीर पहल नहीं की थी, लेकिन शिवसेना के हस्तक्षेप के बाद मात्र कुछ दिनों में प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। शिवसैनिकों ने इसे संगठन की जनहितकारी राजनीति का उदाहरण बताया है।

 

शिवसेना पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन हमेशा आम जनता, श्रमिकों और छोटे कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा रहा है। “छोटे से छोटे कार्यकर्ता के साथ सारे शिवसैनिक खड़े हैं” के संकल्प को संगठन ने एक बार फिर जमीन पर उतारकर दिखाया है। संगठन ने चेतावनी दी कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह संघर्ष जारी रहेगा।

 

क्षेत्र में अब यह कार्रवाई चर्चा का केंद्र बनी हुई है और लोग इसे प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ जनदबाव की बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं।

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