पैतृक भूमि विवाद का सुखद अंत: टोरेंट पावर की पहल से जुड़े बिखरे रिश्ते, दिव्यांग रामदीन को मिली नई उड़ान

---Advertisement---

 

 

अनूपपुर रक्सा कोलमी ग्राम महुदा के निवासी रामदीन राठौर के परिवार में वर्षों से सुलग रहा पैतृक भूमि विवाद आखिरकार शांत हो गया। रक्सा-कोलमी की उस जमीन ने, जिसने कभी रिश्तों में दूरियां पैदा कर दी थीं, अब फिर से अपनापन लौटा दिया है। चार परिवारों के बीच चला आ रहा यह लंबा मतभेद अब Torrent Power के संवेदनशील हस्तक्षेप से समाप्त हो गया है। इस पहल को ग्रामीणों ने केवल समाधान नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने वाली एक मानवीय मिसाल बताया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

जानकारी के अनुसार, पैतृक भूमि के मुआवजे को लेकर विवाद की शुरुआत हुई थी। एक परिवार द्वारा कंपनी से मुआवजा प्राप्त कर लिया गया, जबकि शेष भूमि पर तीन अन्य परिवार वर्षों से खेती करते रहे। समय बीतता गया और जमीन का यह बंटवारा दिलों में भी दरार बनता चला गया। जहां कभी एक ही आंगन में हंसी गूंजती थी, वहां अब खामोशी और दूरी ने जगह ले ली थी।

कंपनी की पहल से सुलझा मामला

स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कंपनी के अधिकारियों ने इसे केवल एक विवाद नहीं, बल्कि एक बिखरते परिवार की पीड़ा के रूप में देखा। श्री एस. के ,मिश्रा महाप्रबंधक

ओ. पी. नैनीवाल – सहायक महाप्रबंधक

धीरज सिंह (AGM)

सुधाकर पाण्डेय (Consultant) ने सभी चारों परिवारों को एक साथ बैठाकर संवाद का रास्ता चुना।

कभी भावनाएं उमड़ीं, तो कभी चुप्पी ने शब्दों का स्थान लिया, लेकिन अंततः समझ और सहमति की जीत हुई। दशकों से चला आ रहा यह विवाद आपसी सहमति से समाप्त हुआ और वर्षों बाद चारों परिवारों के चेहरे पर एक साथ सुकून नजर आया।

दिव्यांग रामदीन को मिला सहारा

इस घटनाक्रम के बीच एक और भावुक पहल सामने आई। रामदीन राठौर, जिनके दोनों पैर उनका साथ नहीं देते, अब तक हर छोटे-बड़े काम के लिए दूसरों पर निर्भर थे। उनके जीवन की यह मजबूरी जैसे एक अनकहा दर्द बन चुकी थी।

कंपनी ने इस दर्द को महसूस किया और उन्हें तीन पहिया स्कूटर खरीदने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की। यह सहायता केवल एक साधन नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान को लौटाने की एक कोशिश थी।

जीवन में आया नया उजाला

स्कूटर मिलने के बाद रामदीन की जिंदगी जैसे बदल गई। अब वे खुद अपने कामों के लिए निकलते हैं, गांव की गलियों में आत्मविश्वास के साथ चलते हैं। उनकी आंखों में चमक और चेहरे पर संतोष यह बताने के लिए काफी है कि यह बदलाव उनके लिए कितना बड़ा है।

भावुक होकर रामदीन कहते हैं,

“जिंदगी का बड़ा हिस्सा दूसरों के सहारे बीता… लेकिन अब लगता है कि मैं भी अपने पैरों पर खड़ा हूं। यह सिर्फ स्कूटर नहीं, मेरी आजादी है।”

ग्रामीणों ने की सराहना

गांव के लोगों ने इस पहल को दिल से सराहा है। उनका कहना है कि यह केवल जमीन के विवाद का अंत नहीं, बल्कि रिश्तों में आई दूरियों को खत्म करने की शुरुआत है। चारों परिवारों के बीच बनी सहमति और रामदीन को मिली सहायता ने पूरे गांव में एक संदेश दिया है।

सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण

टोरेंट पावर कंपनी का यह प्रयास यह दर्शाता है कि जब उद्योग केवल विकास नहीं, बल्कि इंसानियत को भी प्राथमिकता देते हैं, तो बदलाव गहरा और स्थायी होता है।

यह घटना बताती है कि

जहां संवेदनशीलता होती है, वहां समाधान अपने आप जन्म लेता है…

और जहां सहयोग होता है, वहां हर संघर्ष एक नई शुरुआत बन जाता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

July 11, 2026

July 11, 2026

July 11, 2026

July 11, 2026

July 11, 2026

July 10, 2026

Leave a Comment