87 दिन से जिले में विचरण कर रहे तीन हाथी, ग्रामीणों में दहशत

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87 दिन से जिले में विचरण कर रहे तीन हाथी, ग्रामीणों में दहशत
रिपोर्टर: शशिधर अग्रवाल, कोयलांचल समाचार

अनूपपुर। जिले में पिछले 87 दिनों से विचरण कर रहे तीन हाथियों का दल गुरुवार की सुबह गोबरी के जंगल से निकलकर सोनमौहरी के जंगल में पहुंच गया, जहां दिनभर विश्राम करने के बाद रात में फिर आसपास के गांवों की ओर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। लगातार हो रहे हाथियों के मूवमेंट से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और खेतों तथा घरों को नुकसान पहुंचने से लोग परेशान हैं।

जानकारी के अनुसार पिछले एक सप्ताह से यह हाथियों का दल वन परिक्षेत्र जैतहरी के ग्राम पंचायत गोबरी के जंगल में डेरा डाले हुए था। रात होते ही हाथी आसपास के खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे। बुधवार देर रात हाथियों ने झुलसी तलैया और कुदुरझोरी नाला पार करते हुए पंगना पंचायत के जल्दाटोला पहुंचकर महेंद्र सिंह के खेत में लगी गर्मी की धान की फसल को नुकसान पहुंचाया।

इसके बाद हाथियों ने बेलियाकछरा निवासी सुल्तान सिंह के पक्के मकान का दरवाजा तोड़ दिया और घर में रखी धान की बोरियां बाहर निकालकर खा लीं। वहीं मुकेश राठौर, गणेश राठौर और लल्लू सिंह के खेतों में लगी गेहूं, चना और अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद हाथियों का दल तिपान नदी पार कर छुल्हा पंचायत के खेतों की ओर बढ़ गया।

रास्ते में हाथियों ने अमगवां पंचायत के खिरनाटोला निवासी मनोज राठौर के खेत में लगे केले के कई पेड़ों और गेहूं की फसल को भी नुकसान पहुंचाया। कई घंटों तक खेतों में उत्पात मचाने के बाद गुरुवार सुबह हाथियों का दल सोनमौहरी के बांस प्लांटेशन क्षेत्र में पहुंचकर विश्राम कर रहा है।

हाथियों के लगातार विचरण और फसलों को नुकसान पहुंचाने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी और भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही हाथी किसी भी गांव में पहुंचकर खेतों और मकानों को नुकसान पहुंचा देते हैं, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।

वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की निगरानी कर रही है। वन परिक्षेत्र अधिकारी जैतहरी विवेक मिश्रा, सहायक कोमल सिंह मरावी, राजू केवट, कुंवर सिंह सोरठे सहित वनपाल, वनरक्षक, वन सुरक्षा श्रमिक और हाथी मित्र दल के सदस्य ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दे रहे हैं। बावजूद इसके हाथियों के लगातार मूवमेंट से ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों ही देखने को मिल रहा है।

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