राष्ट्रीय अभिलेखागार से मंजूरी के बाद ईसीएल में लागू हुई अभिलेख संरक्षण नीति

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राष्ट्रीय अभिलेखागार से मंजूरी के बाद ईसीएल में लागू हुई अभिलेख संरक्षण नीति

पारदर्शिता, जवाबदेही और डिजिटल सुशासन को मिलेगा बढ़ावा, आधिकारिक रिकॉर्ड प्रबंधन होगा और अधिक व्यवस्थित

सांकतोरिया। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) ने संस्थागत अभिलेख प्रबंधन को नई दिशा देते हुए राष्ट्रीय अभिलेखागार, भारत (एनएआई) से अनुमोदित अभिलेख संरक्षण नीति (रिकॉर्ड रिटेंशन पॉलिसी) का औपचारिक रूप से क्रियान्वयन कर दिया है। इसे प्रशासनिक पारदर्शिता, वैधानिक अनुपालन और डिजिटल सुशासन की दिशा में कंपनी की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

यह नीति लोक अभिलेख अधिनियम, 1993 तथा केंद्रीय सचिवालय कार्यालय प्रक्रिया नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई है। नियमानुसार प्रत्येक अभिलेख सृजन एजेंसी को अपने कार्यों से संबंधित अभिलेख संरक्षण अनुसूची तैयार कर राष्ट्रीय अभिलेखागार से अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होता है। ईसीएल ने इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए नीति को लागू कर दिया है।

नई नीति के तहत कंपनी के सभी आधिकारिक अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण, वर्गीकरण, रख-रखाव, समय-समय पर समीक्षा तथा निर्धारित अवधि पूर्ण होने पर नियमानुसार निष्पादन की स्पष्ट व्यवस्था की गई है। इससे दस्तावेजों के प्रबंधन में एकरूपता आएगी, प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी तथा रिकॉर्ड की उपलब्धता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। साथ ही विभिन्न वैधानिक एवं नियामकीय आवश्यकताओं का पालन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

ईसीएल प्रबंधन का मानना है कि इस नीति के लागू होने से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी तथा प्रभावी रिकॉर्ड प्रबंधन के माध्यम से संस्थागत सुशासन को नई मजबूती मिलेगी। यह पहल भविष्य में डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली को और अधिक सक्षम बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक सतीश झा की दूरदर्शी सोच तथा निदेशक (मानव संसाधन) गुंजन कुमार सिन्हा के नेतृत्व में इस नीति को अंतिम रूप दिया गया। अधिकारियों के अनुसार यह केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि संगठन की दीर्घकालिक कार्यप्रणाली को व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने की व्यापक पहल है।

इस नीति को तैयार करना और राष्ट्रीय अभिलेखागार से अनुमोदन प्राप्त करना एक जटिल एवं व्यापक प्रक्रिया थी। प्रशासन विभाग ने आबीर मुखोपाध्याय के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के समन्वय से इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया। पूरी प्रक्रिया के दौरान वैधानिक प्रावधानों, प्रशासनिक आवश्यकताओं और संगठनात्मक सर्वोत्तम प्रथाओं का विशेष ध्यान रखा गया।

ईसीएल का कहना है कि अभिलेख संरक्षण नीति का क्रियान्वयन केवल दस्तावेजों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण, दीर्घकालिक महत्व के अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण और सार्वजनिक अभिलेख प्रबंधन के राष्ट्रीय मानकों को अपनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। कंपनी का उद्देश्य आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और डिजिटल-सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है, जिससे भविष्य में संगठनात्मक कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी एवं सुचारु बन सके।

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