राजभाषा को कार्यालयीन कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग बनाएं : नृपेन्द्र नाथ
सीएमपीडीआई में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम) रांची की बैठक सम्पन्न, 28 सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

रांची। सीएमपीडीआई मुख्यालय में गुरुवार को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), रांची की बैठक का आयोजन निदेशक (तकनीकी/सीआरडी) एवं समिति के अध्यक्ष नृपेन्द्र नाथ की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में रांची स्थित विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन, कार्यालयों में उसके बढ़ते उपयोग और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), रांची के सदस्य सचिव संजय कडम्बार तथा गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के पूर्व क्षेत्र के उपनिदेशक एवं पर्यवेक्षक विचित्रसेन गुप्त सहित रांची स्थित लगभग 28 सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मेकॉन लिमिटेड द्वारा आयोजित विभिन्न राजभाषा प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। साथ ही नराकास की वार्षिक पुरस्कार योजना 2025-26 के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीसीएल, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और मेकॉन लिमिटेड को सम्मानित किया गया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में नृपेन्द्र नाथ ने कहा कि पुरस्कार प्राप्त सभी प्रतिभागी एवं कार्यालय बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों ने राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य किया है, उनके प्रयास अन्य सदस्य कार्यालयों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे।
उन्होंने कहा कि राजभाषा अधिनियम, 1963 तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार सभी सरकारी उपक्रमों की जिम्मेदारी है कि वे अपने कार्यालयों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग सुनिश्चित करें। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति ऐसा साझा मंच है, जहां विभिन्न कार्यालय आपसी समन्वय और विचार-विमर्श के माध्यम से राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में कार्य करते हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर बैठकों, कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने तिमाही राजभाषा प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकांश सदस्य कार्यालयों ने हिंदी के प्रयोग में उल्लेखनीय प्रगति की है। विभिन्न संस्थानों में राजभाषा कार्यशालाएं, प्रतियोगिताएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा राजभाषा पत्रिकाओं का नियमित प्रकाशन जैसे सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजभाषा का प्रयोग केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे कार्यालयीन कार्य संस्कृति का स्वाभाविक हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
नृपेन्द्र नाथ ने कहा कि आधुनिक तकनीक के इस दौर में द्विभाषी सॉफ्टवेयर का अधिकतम उपयोग, कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण तथा डिजिटल माध्यमों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देकर राजभाषा के उपयोग को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी सदस्य कार्यालयों से आग्रह किया कि नराकास की बैठकों में कार्यालय प्रमुख स्वयं उपस्थित रहें, ताकि राजभाषा कार्यान्वयन की पारदर्शी एवं प्रभावी समीक्षा सुनिश्चित हो सके।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने भी अपने-अपने कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के उपयोग को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की और भविष्य में इसे और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 से नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (उपक्रम), रांची की अध्यक्षता का दायित्व सीएमपीडीआई के पास है। समिति में कुल 37 सार्वजनिक उपक्रम सदस्य हैं, जो राजभाषा हिंदी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सामूहिक रूप से कार्य कर रहे हैं।




































