पुलिस से मिली जमानत निरस्त, आपत्तिजनक फोटो-वीडियो से ब्लैकमेलिंग के तीन आरोपी जेल भेजे गए

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पुलिस से मिली जमानत निरस्त, आपत्तिजनक फोटो-वीडियो से ब्लैकमेलिंग के तीन आरोपी जेल भेजे गए

कोतमा। युवती की चोरी-छिपे आपत्तिजनक तस्वीरें एवं वीडियो बनाने, उन्हें व्हाट्सएप पर भेजकर मिलने और शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालने तथा ऐसा नहीं करने पर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस द्वारा जमानत मुचलके पर छोड़े गए तीन आरोपियों की नियमित जमानत याचिका प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय ने निरस्त करते हुए तीनों को जेल भेजने के आदेश दिए हैं।

मामला कोतमा थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, पीड़िता ने 26 दिसंबर 2025 को थाना कोतमा में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निखिल पनिका पिता रवि पनिका, उम्र 20 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 6 पुरानी बस्ती कोतमा, आनंद कुमार साहू पिता संतोष कुमार साहू, उम्र 20 वर्ष, निवासी बरही थाना नौरोजाबाद जिला उमरिया तथा आयुष मिश्रा उर्फ देवेन्द्र पिता वीरेन्द्र मिश्रा, उम्र 22 वर्ष, निवासी कोतमा ने चोरी-छिपे उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें एवं वीडियो बना लिए थे।

शिकायत के मुताबिक आरोपियों द्वारा उक्त फोटो और वीडियो व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़िता को भेजे गए और लंबे समय से उसे लगातार मैसेज कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोपियों पर मिलने और शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालने तथा ऐसा नहीं करने पर फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने का आरोप है।

गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था मामला

शिकायत के आधार पर थाना कोतमा में अपराध क्रमांक 33/2026 दर्ज किया गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 75(2), 77, 308(3), 296बी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67सी तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।

अभियोजन के अनुसार, आरोपियों के विरुद्ध अन्य मामले भी लंबित हैं। प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान अपराध में पांच वर्ष तक की सजा के प्रावधान को देखते हुए पुलिस द्वारा आरोपियों को जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया था। हालांकि, मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए। फॉरेंसिक यूनिट द्वारा जांच किए जाने पर मोबाइल से कथित आपत्तिजनक फोटो एवं वीडियो रिकवर किए गए। अभियोजन का कहना है कि इससे प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि हुई।

चालान पेश होने के बाद न्यायालय में हुई सुनवाई

मामले में पुलिस द्वारा 10 अगस्त 2026 को चालान/अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसके बाद तीनों आरोपियों की ओर से नियमित जमानत के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया गया।

मामले की सुनवाई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती माया विश्वलाल के न्यायालय में हुई। शासन की ओर से लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा ने आरोपियों की जमानत का विरोध करते हुए मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच में मोबाइल से फोटो-वीडियो रिकवर होने तथा आरोपियों के विरुद्ध लंबित अन्य मामलों सहित विभिन्न तथ्यों को न्यायालय के समक्ष रखा।

लोक अभियोजक द्वारा की गई बहस और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने तीनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिका निरस्त कर दी। इसके साथ ही पुलिस द्वारा पूर्व में जमानत मुचलके पर छोड़े गए निखिल पनिका, आनंद कुमार साहू और आयुष मिश्रा उर्फ देवेन्द्र को जेल भेज दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताड़ना के मामले में न्यायालय के सख्त रुख की चर्चा है। अभियोजन की ओर से मामले में पैरवी लोक अभियोजक पुष्पेन्द्र कुमार मिश्रा ने की।

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