फर्जी जाति प्रमाण पत्र और अनियमितताओं के आरोपों पर पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को लेकर पत्रकार संगठन का प्रदर्शन

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फर्जी जाति प्रमाण पत्र और अनियमितताओं के आरोपों पर पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को लेकर पत्रकार संगठन का प्रदर्शन

राष्ट्रीय अधिमान्य पत्रकार संगठन ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग, शासन के विभिन्न विभागों को भेजा ज्ञापन; आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी

भोपाल। राष्ट्रीय अधिमान्य पत्रकार संगठन ने शुक्रवार को भोपाल के एमपी नगर स्थित डीबी मॉल के समीप आयोजित पत्रकार वार्ता में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रभारी मुख्य अभियंता सुरेश चंद्र वर्मा के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने कथित रूप से फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पद पर नियुक्ति प्राप्त की और बाद में पदोन्नतियां भी हासिल कीं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी या लोक निर्माण विभाग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

पत्रकार वार्ता में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि वर्ष 1992 में सहायक अभियंता (सिविल) के रूप में हुई नियुक्ति में कथित तौर पर कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में शासन से निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

संगठन ने मदन महल फ्लाईओवर परियोजना का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जबलपुर में निर्माणाधीन इस परियोजना में सप्लीमेंट्री राशि की स्वीकृति में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। संगठन ने इन आरोपों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

पत्रकार वार्ता में यह भी दावा किया गया कि इस संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग, मुख्य सचिव, लोकायुक्त तथा आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) सहित विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं को शिकायतें भेजी गई हैं।

प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद मिश्र ने यह भी कहा कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मुद्दे पर पहले एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका दायर की गई थी। उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने वर्ष 2023 में उपलब्ध कराई गई सूचना में संबंधित जाति से जुड़े किसी लंबित प्रकरण से इनकार किया था। संगठन का आरोप है कि इस आधार पर न्यायालय को भी गुमराह किया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस समाचार द्वारा नहीं की गई है।

पत्रकार वार्ता में संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी उच्च पद पर पदोन्नति के प्रयास में हैं और यदि जांच पूरी हुए बिना पदोन्नति दी जाती है तो संगठन न्यायालय की शरण लेगा।

इस अवसर पर संगठन के संरक्षक आदर्श संजर, राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रावेंद्र मिश्रा, प्रदेश महामंत्री सुनील सैनी, सर्व देव सिंह यादव सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।

(नोट: यह समाचार राष्ट्रीय अधिमान्य पत्रकार संगठन द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है तथा संबंधित अधिकारी सुरेश चंद्र वर्मा, लोक निर्माण विभाग या राज्य सरकार का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)

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