चोरी के कोयले से धधक रहे जमुना के ईंट भट्टे? हरद साइडिंग और बंद खदानों से अवैध आपूर्ति के आरोप

---Advertisement---

चोरी के कोयले से धधक रहे जमुना के ईंट भट्टे? हरद साइडिंग और बंद खदानों से अवैध आपूर्ति के आरोप

कोयला चोरी, प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन पर उठे सवाल; संयुक्त जांच की मांग तेज

अनूपपुर। जिले के भालूमाड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत जमुना इलाके में संचालित कुछ ईंट भट्टे इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन भट्टों में ईंट पकाने के लिए हरद रेलवे साइडिंग तथा बंद पड़ी कोयला खदानों से चोरी कर लाया गया कोयला इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह न केवल सरकारी संपत्ति की चोरी का मामला होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण एवं खनन संबंधी कानूनों के उल्लंघन का भी गंभीर विषय होगा।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार क्षेत्र में लंबे समय से संगठित तरीके से कोयला चोरी का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। आरोप है कि बंद पड़ी खदानों और रेलवे क्षेत्र से कोयला एकत्र कर दलालों के माध्यम से ईंट भट्टों तक पहुंचाया जाता है। इसके लिए कथित तौर पर बाइक, साइकिल और अन्य छोटे वाहनों का उपयोग किया जाता है। प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयला भट्टों तक पहुंचने की चर्चा क्षेत्र में आम है, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

आबादी के बीच संचालित हो रहे भट्टे, प्रदूषण से लोग परेशान

जमुना बस्ती और आसपास के आबादी वाले क्षेत्रों के समीप संचालित कुछ ईंट भट्टों को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। भट्टों से निकलने वाला धुआं, राख और प्रदूषण आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भट्टे पर्यावरणीय मानकों और निर्धारित दूरी के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं तो संबंधित विभागों को तत्काल निरीक्षण कर कार्रवाई करनी चाहिए।

कोयला चोरी पर क्यों नहीं लग रही रोक?

क्षेत्र में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि हरद रेलवे साइडिंग और बंद खदानों से लगातार कोयला चोरी होने के बावजूद अब तक प्रभावी रोक क्यों नहीं लग सकी। लोगों का कहना है कि नियमित निगरानी, गश्त और संयुक्त कार्रवाई से इस अवैध गतिविधि पर अंकुश लगाया जा सकता है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ईंट भट्टों के संचालन के लिए ये नियम हैं अनिवार्य

नियमों के अनुसार किसी भी ईंट भट्टे के संचालन के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना आवश्यक है। इसके अलावा राजस्व विभाग एवं स्थानीय निकाय से भूमि उपयोग संबंधी अनुमति लेना अनिवार्य होता है। ईंट भट्टा आबादी, विद्यालय, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थलों से निर्धारित दूरी पर स्थापित होना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के सभी प्रावधानों का पालन करना भी आवश्यक है।

इसके साथ ही चोरी के कोयले या किसी प्रतिबंधित ईंधन का उपयोग पूरी तरह अवैध माना जाता है। श्रम कानूनों का पालन, मजदूरों की सुरक्षा तथा बाल श्रम निषेध के नियमों का पालन भी अनिवार्य है। इन नियमों के उल्लंघन पर संबंधित विभाग द्वारा जुर्माना, संचालन पर रोक और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

संयुक्त जांच की उठी मांग

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और पुलिस से संयुक्त जांच अभियान चलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह जांच केवल कथित कोयला चोरी तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी देखा जाए कि क्षेत्र में संचालित सभी ईंट भट्टे वैधानिक अनुमति, पर्यावरणीय मानकों और अन्य कानूनी प्रावधानों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

यदि जांच में कोयला चोरी, अवैध ईंधन के उपयोग अथवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा वैध रूप से कारोबार करने वाले संचालकों के हितों की भी रक्षा हो सकेगी।

 

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Related News

July 18, 2026

July 18, 2026

July 18, 2026

July 18, 2026

July 18, 2026

July 18, 2026

Leave a Comment