आईजीएनटीयू के शोधार्थी सत्यम दुबे ने रचा इतिहास: एएसआई की अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग में जूनियर कंसल्टेंट बने
यूजीसी-जेआरएफ में 99.48 परसेंटाइल हासिल करने वाले शोधार्थी की नई उपलब्धि, विश्वविद्यालय में खुशी का माहौल
अमरकंटक। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग के शोधार्थी सत्यम दुबे ने भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई), नई दिल्ली की प्रतिष्ठित अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग में जूनियर कंसल्टेंट के रूप में चयनित होकर विश्वविद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिसर में हर्ष का माहौल है तथा शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उन्हें बधाई दी है।
सत्यम दुबे इससे पहले भी भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग के आइकोनिक साइट्स प्रोग्राम के अंतर्गत युवा पुरातत्त्वविद् के रूप में एएसआई मुख्यालय, नई दिल्ली में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पुरातत्त्व एवं सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में उनकी निरंतर सक्रियता और उत्कृष्ट कार्यशैली के कारण उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।
सत्यम की शैक्षणिक उपलब्धियां भी उल्लेखनीय रही हैं। वर्ष 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा आयोजित जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 99.4860499 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। वर्तमान में वह आईजीएनटीयू के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग में डॉ. शिवा कांत त्रिपाठी के निर्देशन में शोध कार्य कर रहे हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. शिवा कांत त्रिपाठी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सत्यम दुबे विभाग के अत्यंत मेधावी और परिश्रमी शोधार्थी हैं। अंडरवाटर आर्कियोलॉजी जैसे विशिष्ट एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में उनका चयन विभाग के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि सत्यम भविष्य में भारतीय पुरातत्त्व और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने कहा कि प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग अपनी स्थापना से ही उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा के लिए जाना जाता रहा है। विभाग के योग्य शिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यार्थियों की मेहनत का परिणाम है कि यहां के छात्र लगातार राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। उन्होंने सत्यम दुबे को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
इस अवसर पर विभाग के सह आचार्य डॉ. मोहन लाल चढ़ार, सहायक आचार्य डॉ. जिनेंद्र जैन, डॉ. जनार्दन बी., डॉ. जयेन्द्र जोगलेकर सहित विभाग के सभी शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सत्यम दुबे को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सत्यम दुबे की यह उपलब्धि न केवल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है, बल्कि मध्यप्रदेश और पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है कि समर्पण, मेहनत और उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के बल पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाओं में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया जा सकता है।



































