नौ साल की बच्ची की लौटी मुस्कान, जटिल कोहनी विकृति का सफल ऑपरेशन
रिपोर्टर अरुण कुमार द्विवेदी, शहडोल
चोट के बाद टेढ़ी हो गई थी कोहनी, विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सुधारात्मक सर्जरी से दिया नया जीवन
शहडोल। समय पर सही उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह किसी गंभीर समस्या को भी दूर कर सकती है। शहडोल में ऐसा ही एक प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां नौ वर्षीय बच्ची की चोट के बाद विकसित हुई जटिल कोहनी विकृति का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। सुधारात्मक सर्जरी के बाद बच्ची की कोहनी की विकृति काफी हद तक ठीक हो गई है और वह अब सामान्य जीवन की ओर लौट रही है।
कुछ समय पूर्व बच्ची की बाईं कोहनी में गंभीर चोट लग गई थी, जिसके कारण कोहनी के जोड़ में फ्रैक्चर हो गया था। बच्ची का प्रारंभिक उपचार डिंडोरी में कराया गया, जहां उसके हाथ में प्लास्टर चढ़ाया गया। प्लास्टर हटने के बाद परिजनों ने देखा कि बच्ची की कोहनी सामान्य स्थिति में आने के बजाय धीरे-धीरे टेढ़ी होती जा रही है।
चिकित्सकीय जांच में इस विकृति को क्यूबिटस वैल्गस डिफॉर्मिटी के रूप में चिन्हित किया गया। परिजनों ने बेहतर उपचार की उम्मीद में कई अस्पतालों और विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क किया, लेकिन संतोषजनक समाधान नहीं मिल सका। अंततः वे श्रीराम हेल्थ सेंटर, शहडोल पहुंचे, जहां ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अमोल प्रभाकर पांडेय ने बच्ची की विस्तृत जांच के बाद सुधारात्मक सर्जरी की सलाह दी।
यह सर्जरी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि कोहनी के कोण को सटीक रूप से ठीक करने के साथ-साथ आसपास की महत्वपूर्ण नसों और रक्तवाहिनियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने पूरी सावधानी और अनुभव के साथ सर्जरी की, जो सफल रही।
ऑपरेशन के बाद बच्ची की कोहनी की विकृति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। बच्ची और उसके परिजन उपचार के परिणाम से बेहद खुश हैं। लंबे समय से बेटी की समस्या को लेकर चिंतित परिवार के लिए यह सफलता बड़ी राहत लेकर आई है।
चिकित्सकीय सफलता की यह कहानी उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके बच्चों को चोट या फ्रैक्चर के बाद हाथ-पैर में विकृति जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की चोट को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चोट के बाद समय पर जांच, उचित उपचार और नियमित फॉलोअप बेहद जरूरी है।
यदि फ्रैक्चर के बाद किसी अंग की स्थिति या आकार में असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। समय पर समस्या की पहचान होने से कई गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। वहीं, यदि विकृति विकसित हो भी जाए तो विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक चिकित्सकों की देखरेख में सुधारात्मक सर्जरी के माध्यम से उसका उपचार संभव है।
नौ वर्षीय बच्ची की सफल सर्जरी ने उसके परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटाने के साथ यह संदेश भी दिया है कि सही समय पर सही विशेषज्ञ तक पहुंचना उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


































































